6 सूत्री मांगों को लेकर ४०वें दिन भी नल-जल अनुरक्षकों की भूख हड़ताल जारी, बिहार सरकार से जल्द समय-सीमा तय करने की मांग
पटना: बिहार प्रदेश नल जल अनुरक्षक संघ के आह्वान पर 17 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ४०वें दिन भी जारी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष गणेश कुमार चौधरी के नेतृत्व में अपनी 6 सूत्री मांगों को लेकर अनुरक्षक आंदोलनरत हैं।
क्या है पूरा मामला?
पत्र के अनुसार, 16 सितंबर को 31वें दिन आंदोलनकारियों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए शांतिपूर्ण मार्च निकाला था। जिला मजिस्ट्रेट की पहल पर पंचायती राज विभाग की ओर से 7 सदस्यीय समिति की उपस्थिति में संघ के प्रदेश अध्यक्ष को मांगों को पूरा करने का एक आश्वासन पत्र (लिखित पत्र) सौंपा गया। हालांकि, इस पत्र में मांगों को पूरा करने की कोई निश्चित समय-सीमा (Timeframe) निर्धारित नहीं की गई है।
समय-सीमा तय न होने से असंतुष्ट होकर संघ ने अनशन जारी रखने का फैसला लिया है और 17 सितंबर से अपना अनशन जारी रखा है।
मुख्य मांगें और शासन से अपील
संघ ने मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और पीएचईडी मंत्री से अपील की है कि अनुरक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए विभागीय आदेश की समय-सीमा जल्द से जल्द निर्धारित की जाए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया है कि विभागीय पत्र/आदेश जारी होते ही अनशन समाप्त कर दिया जाएगा।
मानदेय भुगतान और भूमिदाता अनुरक्षकों से जुड़ी अहम बिंदु (पुराने फैसलों के अनुसार):
संलग्न दस्तावेज़ के अनुसार, विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि:
सीधा बैंक खाता भुगतान: अनुरक्षकों के मानदेय का भुगतान अब वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के माध्यम से न होकर ग्राम पंचायत सचिव द्वारा सीधे उनके खातों में डीबीटी (DBT) के ज़रिए किया जाएगा।
ज़मीन का इकरारनामा: जो निजी ज़मीनदाता अपनी ज़मीन राज्यपाल के नाम से निबंधित नहीं करना चाहते, वे ₹1000 के स्टाम्प पेपर पर पंचायत सचिव के साथ इकरारनामा (Agreement) करेंगे। स्टाम्प और नोटरी शुल्क का वहन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।
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अनुरक्षकों का कहना है कि सरकार द्वारा लिखित आश्वासन तो दे दिया गया है, लेकिन जब तक क्रियान्वयन की ठोस तारीख या समय-सीमा तय नहीं होती, तब तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
