Wednesday, September 16, 2026
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सीवान एके-47 कांड: पटना की सड़कों पर RJD का शक्ति प्रदर्शन, वाटर कैनन चलने के बाद तेजस्वी हिरासत में

पटना। सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई एके-47 (AK-47) फायरिंग की घटना ने बिहार की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। बुधवार को इस मुद्दे को लेकर पटना की सड़कों पर उतरा विपक्ष का विरोध प्रदर्शन उस वक्त शक्ति प्रदर्शन में बदल गया, जब पुलिस ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया।

​राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में आयोजित यह राजभवन मार्च जेपी गोलंबर से शुरू होकर करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय करते हुए डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा। कार्यकर्ताओं के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा था और पूरे रास्ते सरकार विरोधी नारेबाजी होती रही।

वाटर कैनन और धक्का-मुक्की के बीच हिरासत

​मार्च जब डाकबंगला चौराहे पर पहुंचा, तो पुलिस की भारी बैरिकेडिंग ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। हालांकि, तेजस्वी यादव अपने समर्थकों के साथ सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। इसके बाद प्रदर्शनकारी जैसे ही इनकम टैक्स चौराहे की ओर बढ़े, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (जल तोपों) का इस्तेमाल किया।

​वाटर कैनन के प्रयोग के बाद चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस पर पानी की बोतलें फेंकने की घटना भी सामने आई। मौके पर पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा। अंततः स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया।

छात्र आंदोलन और प्रतीकात्मक विरोध

​मार्च के दौरान कुछ राजद कार्यकर्ता लकड़ी से बनी एके-47 की आकृतियों के साथ पहुंचे थे, जो सीधे तौर पर सीवान की घटना की ओर इशारा कर रही थीं। तेजस्वी यादव ने मार्च के दौरान नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में छात्रों की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि वे छात्रों के अधिकारों के लिए अंतिम सीमा तक जाएंगे।

विश्लेषण: अस्तित्व की लड़ाई या निरंतरता का अभाव?

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार की जमानत जब्त होने जैसी शर्मनाक विफलता के बाद राजद अपने वजूद के संकट से जूझ रही है। मुख्य विपक्षी दल होने के बावजूद पार्टी पिछले कुछ समय से जन-मुद्दों से दूर दिखाई दे रही थी।

​ऐसे में तेजस्वी यादव का सड़क पर उतरना पार्टी में नई जान फूंकने और खुद को मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में दोबारा स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, इस आंदोलन की टाइमिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं:

प्रतिक्रिया में देरी: सीवान में पुलिस जवान द्वारा एके-47 निकाले जाने की घटना 17 जुलाई की है। इस घटना के पूरे एक महीने बाद सड़कों पर उतरने के फैसले ने राजद समर्थकों को ही असमंजस में डाल दिया।

निरंतरता की चुनौती: विपक्ष में मजबूती से टिके रहने के लिए केवल एक दिन का शक्ति प्रदर्शन काफी नहीं होता। यदि राजद अपने आंदोलनों में निरंतरता और रणनीतिक तत्परता नहीं ला पाती है, तो आने वाले समय में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह फीका पड़ सकता है।

​फिलहाल, तेजस्वी यादव की हिरासत ने इस पूरे मामले को राज्यस्तरीय राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। देखना यह होगा कि राजद इस मुद्दे को लंबे समय तक जन-आंदोलन में तब्दील कर पाती है या यह भी एक सामयिक प्रदर्शन बनकर रह जाता है।

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