पटना, 1 सितम्बर 2025 (सोमवार)।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. की अध्यक्षता में समाहरणालय, पटना में आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति पर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क सुरक्षा मानकों का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए और जनजागरूकता अभियान को नियमित तौर पर चलाया जाए।
सड़क सुरक्षा पर डीएम के निर्देश
जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही बढ़ोतरी प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने कहा –
“सड़क सुरक्षा के बारे में नागरिकों को समुचित जानकारी देकर तथा आम जनता के द्वारा इसका अनुपालन कर दुर्घटनाओं की विभीषिकाओं को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।”
सड़क सुरक्षा के पाँच घटक – सुरक्षित यातायात व्यवहार, दुर्घटना-पश्चात देखभाल, सड़क सुरक्षा प्रबंधन, सुरक्षित सड़क निर्माण तथा सुरक्षित वाहन निर्माण – हर स्तर पर लागू किए जाने चाहिए।
एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कम से कम पाँच ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर उनका परिमार्जन करें और हर बैठक में प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगाने, निर्धारित पार्किंग स्थल, सड़क संकेतक और सीसीटीवी आधारित यातायात निगरानी पर विशेष बल दिया गया।
परिवहन विभाग की कार्रवाई
जिला परिवहन पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि—
1 अप्रैल से 30 जुलाई 2025 तक 3,716 वाहनों की प्रदूषण जांच की गई, जिनमें से 2,041 वाहन फेल पाए गए।
इनके विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 8 करोड़ 25 लाख 62 हजार रुपये से अधिक की शमन राशि वसूली गई।
इसी अवधि में फ्लाई ऐश परिवहन से जुड़े 476 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 267 पर फाइन लगाकर 8 लाख 67 हजार रुपये की वसूली की गई।
हेलमेट/सीट बेल्ट, फिटनेस, बीमा, लाइसेंस और नाबालिग चालकों पर नियमित रूप से विशेष जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।
दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर
डीएम ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से जुलाई 2025 तक पटना जिले में सड़क दुर्घटनाओं के 755 मामले दर्ज हुए, जिनमें—
443 लोगों की मृत्यु हुई
418 लोग घायल हुए
केवल जुलाई 2025 में ही 130 दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 52 लोगों की मौत और 78 लोग घायल हुए।
डीएम ने कहा कि ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं और प्रशासन इसे रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहा है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक में विद्यालय वाहन परिचालन विनियमन, 2020 पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि—
बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सभी स्कूल बसों को पीले रंग में पेंट करना, स्पीड गवर्नर, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, जीपीएस, सीसीटीवी, पैनिक बटन और फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जाए।
विद्यालय प्रबंधन को नियमित तौर पर “बाल परिवहन समिति” की बैठक आयोजित करनी होगी।
बच्चों को बचपन से ही सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे स्वयं और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।
गुड सेमेरिटन और जनसहभागिता
डीएम ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (अच्छे मददगार नागरिक) को जिला प्रशासन द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, स्वयंसेवी संगठनों और छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे सड़क सुरक्षा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
सख्त कार्रवाई का भरोसा
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि—
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू किया जा रहा है, जिसके तहत सीसीटीवी कैमरों से रेड लाइट उल्लंघन, ओवरस्पीडिंग और बिना हेलमेट-सीट बेल्ट वाले मामलों में तुरंत एक्शन लिया जाएगा।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा—
“हम सबको यह संकल्प लेना होगा कि यातायात नियमों का पालन करेंगे और स
ड़क पर स्वयं को सुरक्षित रखते हुए दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे।”
