Tuesday, February 17, 2026
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पटना को मूक-बधिर मुक्त बनाने का संकल्प: डीएम त्यागराजन एसएम ने 17 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए कानपुर रवाना किया

पटना। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने जिला समाहरणालय में एक बेहद भावुक और उम्मीदों भरे कार्यक्रम में उन 17 बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की, जिन्हें 'श्रवण श्रुति कार्यक्रम' के तहत कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए कानपुर भेजा जा रहा है। ये सभी बच्चे पटना के विभिन्न प्रखंडों के हैं और जांच में 'OAE Positive' पाए गए हैं।

पटना। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने जिला समाहरणालय में एक बेहद भावुक और उम्मीदों भरे कार्यक्रम में उन 17 बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की, जिन्हें ‘श्रवण श्रुति कार्यक्रम’ के तहत कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए कानपुर भेजा जा रहा है। ये सभी बच्चे पटना के विभिन्न प्रखंडों के हैं और जांच में ‘OAE Positive’ पाए गए हैं।

जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने एक-एक कर बच्चों से बात की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

6 महीने में 500 बच्चों की सर्जरी का बड़ा लक्ष्य:

जिलाधिकारी ने कहा कि पटना जिला को पूरी तरह मूक-बधिर मुक्त बनाना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए अगले 6 महीनों के भीतर 500 बच्चों की कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि अब तक जिले में 1 लाख 18 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 246 बच्चों में सुनने की समस्या की पहचान हुई है। 89 बच्चों को सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें से 59 बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें स्पीच थेरेपी दी जा रही है।

कानपुर में होगा निःशुल्क ऑपरेशन: चिन्हित 17 बच्चों के बैच को सोमवार को स्व० एस० एन० मेहरोत्रा मेमोरियल ई०एन०टी० फाउन्डेशन, कानपुर के लिए रवाना किया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के गरिमापूर्ण जीवन और समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध है। यह सर्जरी बच्चों के जीवन में नई आवाज और नई ऊर्जा लौटाने वाली साबित होगी।

अधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करने का निर्देश: जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य, आईसीडीएस (ICDS), जीविका, शिक्षा और पंचायती राज सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग रहने का निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी ने कहा जल्द पहचान जरूरी: 0-5 साल तक के बच्चों में श्रवण बाधिता की समय पर पहचान ही उनके सफल उपचार की कुंजी है।सघन स्क्रीनिंग: बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPO) और आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय से शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।

केवल सर्जरी काफी नहीं है, सर्जरी के बाद नियमित स्पीच थेरेपी और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से ही बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल पाएगा।

अभिभावकों के चेहरे पर दिखी मुस्कान: मुलाकात के दौरान कई अभिभावक भावुक नजर आए। उन्होंने जिलाधिकारी की इस पहल को अपने बच्चों के लिए ‘जीवनदान’ बताया।

जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं, ऐसे में ‘श्रवण श्रुति कार्यक्रम’ एक संवेदनशील और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली का जीवंत उदाहरण है।

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