पटना। बिहार कृषि विभाग एक बार फिर दो दिवसीय ‘जिला स्तरीय किसान मेला-सह-उद्यान प्रदर्शनी’ आयोजित करने जा रहा है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), पटना के तत्वावधान में यह दिखावटी आयोजन राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, नौबतपुर, पटना में 17.12.2025 एवं 18.12.2025 को होना तय है।
दावा है कि इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों और नवाचारों से अवगत कराना है।इस मेला में पटना जिले के सभी 23 प्रखंडों के किसान, किसान उत्पादक कम्पनी (FPC) तथा विक्रेता अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। साथ ही, कृषि यंत्रों के प्रदर्शन, उन्नत बीज की जानकारी, और ड्रोन से तरल रसायन छिड़काव का जीवंत प्रदर्शन मुख्य आकर्षणों में शामिल है। ‘
मेला’ या सरकारी पैसे की बर्बादी का ढकोसला?
हालांकि, सवाल उठता है कि राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष आयोजित होने वाले ऐसे भव्य आयोजन, जिस पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, क्या वास्तव में 90% से अधिक किसानों को कोई लाभ पहुँचा पाते हैं? या ये महज सरकारी पैसे की बर्बादी का ढकोसला है, जिसका सीधा फायदा विभागीय अधिकारियों को ‘मनमाना खर्च’ दिखाकर होता है?
बिहार सरकार पूरे साल किसानों के लिए फसलों की विधि, बीज, उर्वरक, और किस्मों से लेकर विभिन्न पंचायत, ब्लॉक, जिला या राज्य स्तरीय प्रशिक्षण देने की निरंतर योजनाएं चलाती है। केंद्र और राज्य की अरबों की योजनाएं बिहार के किसानों के लिए होने का दावा किया जाता है।
पर सवाल यह है: इन करोड़ों की योजनाओं का लाभ बिहार के कितने प्रतिशत किसानों को मिलता है?
लाभान्वित किसानों की सूची की सच्चाई
इसकी सच्चाई सरकारी योजना के लाभान्वित होने वाले किसानों की सूची से समझी जा सकती है। ‘न्यूज़ लहर पटना’ की पड़ताल में अक्सर यह सामने आया है कि कृषि विभाग की योजनाएं ज्यादातर ब्लॉक, जिला या राज्य स्तरीय अधिकारियों के ‘नजदीकियों’ और ‘लगुआ-भगुआ’ तक ही सीमित रहती हैं। यही लोग तय करते हैं कि नई योजनाओं का लाभ किसे मिलेगा।
हकीकत यह है कि गाँव-गाँव में घूमकर पता लगाया जाए तो ज्यादातर किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं का कोई अता-पता नहीं है। किसान गोष्ठी हो या कोई अन्य लाभान्वित करने वाली योजना, सब ब्लॉक के अधिकारियों के ‘पसंदीदा’ लोगों के चयन तक सीमित रहती हैं।
कोरम पूरा करने का खेल
नौबतपुर में होने वाले इस जिला स्तरीय आयोजन में हर प्रखंड की तरफ से स्टॉल होंगे। खबर है कि प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को कृषि से संबंधित सामग्री एकत्रित करने के ‘कड़े निर्देश’ दिए गए होंगे। अधिकारी भी बस कोरम पूरा करेंगे—अपने नजदीकियों को पुराना निर्देश देंगे। और फिर, यह दो दिवसीय प्रदर्शनी ‘सफल हुई’ का रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा,
जबकि असलियत में इसका लाभ गिनती के लोगों को ही मिलेगा।विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अगर चाहें तो इसी प्रदर्शनी में औचक रूप से किसानों से पूछ सकते हैं कि उन्हें इस आयोजन की तैयारियों के बारे में कब कहा गया? और योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं? ऐसा करने पर अपने आप इस सिस्टम की सच्चाई सामने आ सकती है।
इतने महत्वपूर्ण आयोजन के लिए जिला का कृषि विभाग कितना गंभीर है वह इसी से समझा जा सकता है की 17 दिसंबर को होने वाले इस आयोजन की प्रेस विज्ञप्ति आज 12 दिसंबर को जारी की गई है। सिर्फ 5 दिन का समय है।
न्यूज़ लहर पटना का प्रयास यही है कि बिहार में किसानों के लिए आवंटित राशि का फायदा कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तव में किसानों को मिले और उनका विकास हो।
