Monday, March 2, 2026
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पटना नीट छात्रा मामला: सीबीआई बालों से उनकी बेटियां जरूर पूछती होंगी, इस मामले में पीड़िता को इंसाफ मिलेगा भी या नहीं??

पटना के बहुचर्चित निट छात्रा बलात्कार एवं मृत्यु के मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर बहस करते हुए पीड़िता पक्ष के वकील एस के पांडे आज बेहद भावुक हो गए और इस मामले में सीबीआई की संदिग्ध भूमिका पर उन्होंने सीधा माननीय न्यायधीश को संबोधित करते हुए सीबीआई को आरोपी मनीष रंजन की पॉकेट में होने का गंभीर आरोप लगाया।

इसके साथ उन्होंने कहा है कि इन सीबीआई वालो से उनके परिवार की बेटियां ही पूछती होगी कि इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार वालो को न्याय मिलेगा भी कि नहीं? हालांकि कोर्ट में आज भी आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका आगामी 12 मार्च के लिए टाल दी, यानी की अब आरोपी मनीष रंजन की होली जेल में ही बीतेगी।

आज एक बार फिर इस जमानत याचिका पर सुनवाई लगभग 2 घंटे चली जिसमें सीबीआई की तरफ से आज लिखित में यह बयान आया है कि प्रथमदृष्टया इस मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन कि कहीं भी संलिप्तता नहीं दिखती है इसीलिए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। CBI को मनीष रंजन की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसी पर जब पीडित पक्ष के वकील एसके पांडे ने आरोपी मनीष की संलिप्तता और सीबीआई की अकर्मण्यता गिनाने लगे तो सीबीआई पक्ष के वकील ने उन्हें रोकते हुए कहा कि सुनवाई मनीष रंजन के जमानत का है जांच एजेंसियों के कार्य प्रणाली पर सवाल उठाना एकदम गलत है।

आज माननीय न्यायालय में सीबीआई के वकील आरोपी मनीष रंजन को जमानत दिलाने के लिए इतने उतावले थे की उन्होंने इस मामले की सुनवाई कर रहे माननीय न्यायाधीश से भी कड़ी बहस कर दी।

इसी पर पीडित पक्ष के वकील ने भी भरी अदालत में सीबीआई की इज्जत उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ा। उन्होंने इस मामले में जांच कर रहे सीबीआई की भूमिका को पूरी तरह से संदिग्ध बताया और पीड़ित परिवार को ही प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने माननीय न्यायाधीश के सामने ही उदाहरण देते हुए कहा है की महोदय माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी सीबीआई को पिंजरे का तोता की उपाधि दी है और इस मामले में भी सीबीआई उस उपाधि के मतलब पर सही ठहराया जा सकता है।

उन्होंने माननीय न्यायालय से इस मामले में सबूत से छेड़छाड़ करने के आरोप में राज्य के डीजीपी, एसएसपी, एसपी, हेमंत और रोशनी पर भी मामला दर्ज करने की मांग की है।

इस मामले में पीड़िता पक्ष के शुरुआत से ही कानूनी सहयोग देने में अग्रसर रहे एडवोकेट शशांक शेखर के अनुसार सीबीआई की जांच की जो दिशा है उससे यह कहीं भी नहीं दिख रहा है की पीड़िता के परिवार वालों को न्याय मिलेगा। उनके अनुसार शायद ही पिछले किसी मामले में सीबीआई की ऐसी जांच की दिशा रही होगी।

कानून जानने वाले बताते है कि सीबीआई के ऐसे रवैया से मामला इतना गंभीर होने के बावजूद आरोपी मनीष रंजन को अगले तारीख में इसी सिविल कोर्ट से बेल मिल सकता है। जबकि हत्या या हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले में सिविल कोर्ट से आरोपी को बेल मिलने के बिड़ले ही उदाहरण होंगे।

और सीबीआई के सहयोग से आरोपी को सिविल कोर्ट से बेल मिल जाने से बिहार ही नहीं पूरे देश की बेटियां शर्मशार होगी।

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