पटना नीट छात्रा बलात्कार एवं हत्या की घटना के लगभग डेढ़ महीने का समय बीत गया है। स्थानीय पुलिस, फिर SIT और अब गत 12 फरवरी से इस मामले की जांच CBI कर रही है।
सीबीआई ने भी इस मामले की जांच संभालते ही अपनी जांच की धुरी पूरी तरह से पीड़ित परिवार पर ही केंद्रित कर दिया है। इस मामले की मीडिया ट्रायल में सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित पुलिस कर्मियों से भी पूछताछ की खबरें आ रही है।
लेकिन सीबीआई का अब तक का मुख्य लक्ष्य पीड़ित परिवार के सदस्य ही है। कभी मां-बाप से पूछताछ, कभी पीड़िता के भाई के मोबाइल जप्ती की खबर सुर्खियों में, तो कभी मामा से चार घंटे पूछताछ की जानकारी मीडिया से ही मिल रही है
लेकिन पिछले 8 दिन के निरंतर प्रयास के बावजूद सीबीआई को इस मामले में कोई सफलता नहीं मिलने की बात मीडिया ट्रायल में ही देखी जा सकती है। मतलब अब तक सीबीआई की इस मामले में सफलता ठण ठण गोपाला!
जबकि इस मामले में मीडिया ट्रायल में पीड़ित परिवार को निरंतर जलालत की स्थिति झेलनी पड़ रही है। कभी किसी बड़े दैनिक में “सीबीआई सहमति से या फिर जबरन संबंध स्थापित हुए” इस एंगल से भी जांच कर रही है जैसी खबर छपती है।
तो वही बृहस्पतिवार शाम को पटना के अनेक स्वयंभू पत्रकार कोई इस मामले में पीड़िता के भाई की गिरफ्तारी की दावा करता दिखा है। तो वही दूसरा स्वयंभू पत्रकार पीड़ित के मामा की गिरफ्तारी की दावेदारी करते हुए वीडियो जारी करता है। जबकि इसकी कोई अधिकृत घोषणा सीबीआई के तरफ से नहीं की गई है।
ऐसे में अपनी बेटी की बलात्कार के बाद हत्या जैसी गंभीर और मर्माहत कर देने वाली घटना घर में होने के बावजूद पीड़ित परिवार एक तरफ जहां जांच के नाम पर प्रताड़ित हो रहा है वहीं दूसरी तरफ, ऐसे गंदे मीडिया ट्रायल से रोज जलालत की जिंदगी जीने पर मजबूर है।
मीडिया ट्रायल में यह खबर भी आ रही है कि सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित पुलिस कर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है। लेकिन कहीं भी सीबीआई की जांच की धुरी इस मामले में शुरुआत में ही संदिग्ध आचरण करने वाले अस्पताल प्रबंधन पर नहीं दिख रही है।
क्योंकि संदिग्ध और बेहोश अवस्था में अस्पताल लाई गई पीड़ित छात्रा के मामले की सूचना अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को नहीं दी थी। CBI की तरफ से इन अस्पताल प्रबंधन से किसके दबाव में पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी गई, यह पूछताछ की है कि नहीं, इसकी कोई जानकारी इस मामले की मीडिया ट्रायल में सार्वजनिक नहीं हुई है।
IMA के दबाव की नौटंकी: इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) पटना ने राज्य के DGP विनय कुमार को गत 18 जनवरी को ही एक पत्र देकर संबद्ध अस्पतालों में उचित सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
स्वाभाविक रूप से अगर इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की कहीं भी संलिप्तता साबित होती भी है, तो भी पीड़ित के परिजन या फिर समर्थकों को अस्पताल परिसर में किसी भी तरह का तोड़फोड़, नुकसान या फिर हमला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अस्पताल पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की है।
लेकिन क्या IMA पटना अस्पताल प्रबंधन द्वारा संदिग्ध अवस्था में आए मरीजों के बारे में स्थानीय पुलिस को नहीं सूचित करने की घटना का समर्थन करता है? IMA की नियमावली के अनुसार ऐसे मामलों में IMA पूरी तरह से अपने आप को अलग रखता है। अब ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि संबंधित दोषी अस्पताल प्रबंधन पर उचित कानूनी कार्रवाई करें।
सीबीआई ने पिछले 8 दिनों में पीड़िता के परिवार से हर संभव जांच की है आगे भी जांच करेगी, इसमें सीबीआई को कौन रोक सकता है? लेकिन अपनी जांच की धुरी उन संदिग्ध अस्पताल संचालकों की तरफ भी घुमाए, तो अनेक नई जानकारी के साथ इस जघन्य अपराध की गुत्थी भी सुलझने की पूरी संभावना है।
सीबीआई को उन संदिग्ध अस्पताल संचालकों से सिर्फ यही पूछना है, कि अस्पताल प्रबंधन ने किसके दबाव में संदिग्ध और बेहोश अवस्था में आई छात्रा की प्रारंभिक सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को नहीं दी। अपने आप इस अपराध की पूरी कहानी सामने आ सकती है।
सीबीआई देश की सबसे बड़ी और विश्वसनीय अपराध अन्वेषण एवं अनुसंधान करने वाली संस्था मानी जाती रही है। इसे जांच के लिए सीबीआई को दिशा निर्देश देना किसी के लिए भी ओछी हरकत साबित होगी।
लेकिन यह चर्चाएं अब आम जनमानस में हो रही है। और सीबीआई की जांच की धुरी इस मामले में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले अस्पतालों के तरफ नहीं होने के कारण लोग सीबीआई की भी भूमिका पर संदेह कर रहे हैं।
