पटना:
पटना नगर निगम क्षेत्र की आवासीय कॉलोनियों और क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रही गैर-आवासीय (व्यावसायिक) गतिविधियों पर नगर प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी अंचलों के कार्यपालक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नोटिस प्राप्त संपत्ति धारकों के मामलों की नियमित सुनवाई की जाए और उनका त्वरित एवं नियमानुसार निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत अधिकार हस्तांतरित
बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 27आ (5) के तहत मुख्य नगरपालिका अधिकारी को यह शक्ति प्राप्त है कि वे अपने प्रशासनिक कार्यों एवं जिम्मेदारियों को अधीनस्थ अधिकारियों को सौंप सकते हैं। इसी कानूनी प्रावधान का उपयोग करते हुए आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामलों की अंचल स्तर पर सुनवाई और आवश्यक कार्रवाई का जिम्मा कार्यपालक पदाधिकारियों को सौंपा गया है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन
यह पूरी कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Miscellaneous Application Diary No. 17103/2026 (SLP (C) No. 8044-8045/2025) में पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। इसके तहत पटना नगर निगम के सभी अंचलों में ऐसे भवनों और परिसरों को चिह्नित किया गया है जहाँ आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
चिन्हित संपत्ति धारकों को नगर निगम द्वारा पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। अब उन्हें अंचल स्तर पर अपना पक्ष, दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जा रहा है।
नागरिकों की सुविधा और नियमों का पालन मुख्य उद्देश्य
नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सुनवाई प्रक्रिया को अकारण लंबित न रखा जाए। प्राप्त अभ्यावेदनों और कागजातों का नियमानुसार शीघ्र परीक्षण कर मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाए। पटना नगर निगम का मुख्य उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों में स्वीकृत भू-उपयोग के नियमों का कड़ाई से पालन कराना है, ताकि आम नागरिकों को अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के कारण होने वाली असुविधा और परेशानियों से बचाया जा सके।
