G-HMMWBCZ928
Thursday, October 8, 2026
Homeबिहारपटना नगर निगम: पार्षद स्तरीय बैठकों की कार्यवाही निर्गत कराने की महापौर...

पटना नगर निगम: पार्षद स्तरीय बैठकों की कार्यवाही निर्गत कराने की महापौर की सख्ती

पटना, 2 अगस्त 2025 — पटना नगर निगम के आंतरिक प्रशासनिक व्यवहार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महापौर श्रीमती सीता साहू ने एक अहम संदेश जारी किया है। महापौर ने निगम आयुक्त को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान आयोजित नगर परिषद, स्थायी समिति एवं बजट अनुमोदन से जुड़ी सभी बैठकों की कार्यवाही (Minutes of Meeting) शीघ्रातिशीघ्र निर्गत (जारी) कराई जाए।

यह निर्देश महापौर ने एक औपचारिक पत्र के माध्यम से दिया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि निगम की आधिकारिक बैठकों—जैसे कि बजट समिति की विशेष बैठक (दिनांक 19 मार्च 2025), 43वीं साधारण बैठक (29 मार्च 2025), बजट अनुमोदन पर विशेष बैठक (10 मई 2025), 14वीं स्थायी समिति बैठक (3 जून 2025), 15वीं स्थायी समिति बैठक (25 जून 2025) और भ्रष्टाचार निवारक समिति के गठन से जुड़ी परिषद बैठक (11 जुलाई 2025)—इन सभी की कार्यवाही अब तक निर्गत नहीं की गई है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया और दस्तावेजी पारदर्शिता की ओर कदम

महापौर के अनुसार, इन बैठकों से संबंधित चर्चा, निर्णय और प्रस्तावों का दस्तावेजीकरण नगर निगम कानून के तहत अनिवार्य है। कार्यवाही निर्गत न करने से न केवल प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ता है, बल्कि पार्षदों और जनता को भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।

“बैठकों की कार्यवाही 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक कर देना चाहिए, ताकि किसी भी भ्रामक स्थिति से बचा जा सके और पारदर्शी शासन प्रणाली को बढ़ावा मिले,” — महापौर सीता साहू ने पत्र में लिखा।

क्यों है कार्यवाही निर्गत कराना अहम?

बैठक की कार्यवाही किसी भी निर्णय की कानूनी और प्रशासनिक मान्यता प्रदान करती है। ये दस्तावेज बाद में नीतिगत योजना, बजट आवंटन, पार्षदों के प्रस्तावों व जनहित तय निर्णयों को लागू कराने में आधार बनते हैं। कार्यवाही जारी न होने की स्थिति में कई योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाती हैं।

महापौर सीता साहू का यह ताजा निर्देश इस बात का संकेत है कि वे नगर निगम की कार्यप्रणाली को अधिक संगठित, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के पक्ष में हैं। इस दिशा में कार्यवाही निर्गत कराना एक अहम प्रशासनिक पहल मानी जा रही है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि निगम प्रशासन कितनी तत्परता से इस निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करता है।

यदि समय रहते कार्यवाही जारी नहीं की गई, तो यह विषय शासन स्तर पर भी उठ सकता है। फिलहाल, यह कदम पटना नगर निगम में पारदर्शी प्रशासन लाने की एक मजबूत कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे