पटना: कंकड़बाग थाना क्षेत्र के अशोक नगर स्थित न्यू कुमार नर्सिंग होम में 1 अप्रैल को हुई आगजनी की घटना ने जिला प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। इस घटना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार सुबह जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन और जिला अग्निशमन पदाधिकारी को तलब कर स्थिति की समीक्षा की और जिले के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों की सुरक्षा जांच के कड़े निर्देश जारी किए।
सात दिन का अल्टीमेटम: चप्पे-चप्पे की होगी जांच
जिलाधिकारी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पटना के सभी अस्पतालों (सरकारी और निजी) का एक सप्ताह के भीतर ‘फायर ऑडिट’ संपन्न किया जाए। इस ऑडिट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या अस्पताल आग जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सक्षम हैं।
निजी अस्पतालों को चेतावनी और सख्त निर्देश
बैठक के दौरान डीएम ने निजी अस्पतालों के संचालकों और प्रबंधकों को सख्त लहजे में कहा कि अस्पतालों में सुरक्षात्मक मानकों का अनुपालन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर होना चाहिए। उन्होंने कहा:
”मरीजों, उनके परिजनों और डॉक्टरों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।“
अनुमंडल स्तर पर होगी मॉनिटरिंग
प्रशासनिक चुस्ती को निचले स्तर तक ले जाने के लिए जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) को अपने-अपने क्षेत्रों में अस्पतालों का औचक निरीक्षण और सुरक्षा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुपालन की निगरानी करने का जिम्मा सौंपा है।
अस्पतालों के लिए ‘रेड अलर्ट’
इस कार्रवाई से पटना के चिकित्सा जगत में खलबली मच गई है। फायर ऑडिट के दौरान अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास (Exit Gates) और स्टाफ की ट्रेनिंग जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने सभी हितधारकों (Stakeholders) को सजग और तत्पर रहने की अपील की है ताकि भविष्य में अशोक नगर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
