Thursday, May 21, 2026
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पटना में हीटवेव को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर; जिलाधिकारी पटना त्यागराजन एसएम ने जारी की SOP, अस्पतालों में 88 बेड रिजर्व

पटना, 21 मई 2026:
राजधानी पटना सहित पूरे जिले में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी पटना त्यागराजन एसएम ने आम जनता—विशेषकर बच्चों, महिलाओं, श्रमिकों और बुजुर्गों—की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला-स्तरीय अधिकारियों को सजग रहने तथा आपदा प्रबंधन विभाग की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत कार्य करने का कड़ा निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अत्यधिक गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित न हो, इसके लिए अंतर्विभागीय समन्वय के साथ त्रुटिरहित प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

400 स्थानों पर प्याऊ और पीएचईडी के नियंत्रण कक्ष सक्रिय

बढ़ते तापमान को देखते हुए पटना जिला के 17 नगर निकायों में कुल 400 स्थानों पर प्याऊ की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए 15 आश्रय स्थलों का संचालन किया जा रहा है।

पेयजल संकट से निपटने की तैयारी: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा विभिन्न प्रखंडों में 46 चलंत चापाकल मरम्मति दलों को तैनात किया गया है, जो युद्ध स्तर पर खराब चापाकलों को ठीक करेंगे।

हेल्पलाइन नंबर जारी: पेयजल से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए जिला नियंत्रण कक्ष के दो नंबर जारी किए गए हैं, जहां सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है:

लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, पटना पूर्व: 0612-2225796

लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, पटना पश्चिम: 0612-2280879

स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद: अस्पतालों में बने ‘हीटवेव वार्ड’
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को अस्पतालों में ओआरएस (ORS), आईवी फ्लूइड और जीवन रक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

जिला भर में कुल 30 हीटवेव वार्ड बनाए गए हैं, जिनमें 88 बेड रिजर्व रखे गए हैं।

प्रत्येक पीएचसी (PHC), सीएचसी (CHC) और अनुमंडल अस्पताल में 3-3 बेड तथा जिला अस्पताल में 4 बेड कूलिंग डिवाइस (एसी/कूलर) के साथ तैयार हैं।

आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए चलंत चिकित्सा दल (Mobile Medical Teams) भी तैनात किए जाएंगे।

विभिन्न विभागों को जिलाधिकारी के कड़े निर्देश

शिक्षा विभाग: सभी स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर पेयजल व ORS की व्यवस्था करना। प्रार्थना के समय बच्चों को लू से बचाव की जानकारी देना।

श्रम संसाधन: निर्माण स्थलों और कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए शेड, पेयजल और आइस पैड की व्यवस्था। लू के दौरान कार्य अवधि (वर्किंग आवर्स) में बदलाव करना।

परिवहन विभाग: सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों में अनिवार्य रूप से पीने का पानी, ORS और प्राथमिक उपचार किट की व्यवस्था सुनिश्चित करना। |

समाज कल्याण (ICDS): सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती/धात्री महिलाओं के लिए पेयजल, आवश्यक दवाएं और विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना।

ऊर्जा विभाग: भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा ढीले तारों को तुरंत दुरुस्त करना।

पशु एवं ग्रामीण विकास: सरकारी ट्यूबवेल और मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों/आहरों में पानी भरकर पशु-पक्षियों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करना।

अग्निशमन विभाग: मार्च से जून तक के ‘अग्नि-प्रवण काल’ को देखते हुए आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए SOP के तहत मुस्तैद रहना।

आपातकालीन संपर्क नंबर (24*7 सक्रिय)

किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए जिला प्रशासन ने निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क करने की अपील की है:

अग्निशमन / आपातकालीन सेवा: 112 / 101

जिला आपातकालीन संचालन केंद्र: 0612-2210118

24*7 जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2219810 / 0612-2219234

आपदा प्रबंधन विभाग टॉल-फ्री नंबर: 1070
स्वास्थ्य विभाग हेल्पलाइन: 104

आईएमडी (IMD) के अनुसार: क्या है हीटवेव और इसके लक्षण?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मानकों के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे हीटवेव माना जाता है। यदि सामान्य तापमान से विचलन 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो और वास्तविक तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, तो इसे ‘गंभीर हीटवेव’ की श्रेणी में रखा जाता है।

लू लगने के मुख्य लक्षण:

अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द।

मांसपेशियों में ऐंठन, मितली, उल्टी या दस्त होना।
तेज बुखार आना या अचानक बेहोश हो जाना।
शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक होने पर दौरे पड़ना या कोमा में जाने का खतरा।

क्या करें और क्या न करें?
1.सजग रहें रेडियो, टीवी या समाचार पत्रों के माध्यम से स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें।

  1. प्राथमिक उपचार: यदि कोई व्यक्ति लू से प्रभावित लगे, तो उसे तुरंत छायादार व ठंडी जगह पर ले जाएं। शरीर को गीले कपड़े से पोंछें और होश में होने पर पानी या ओआरएस दें।
  2. इनसे बचें: प्रभावित व्यक्ति को शराब, कैफीन (चाय/कॉफी) या अत्यधिक गैस युक्त पेय पदार्थ बिल्कुल न दें।
  3. विशेष देखभाल: 4 साल तक के बच्चे, 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्तियों का इस मौसम में अतिरिक्त ख्याल रखें।

जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचें, ढीले व हवादार कपड़े पहनें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

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