पटना नीट छात्रा बलात्कार और हत्या की मामले की जांच राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र कि नरेंद्र मोदी सरकार और देश के गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर सीबीआई को सौंपा गया। इस मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में गत 12 फरवरी को लिया था और 20 दिन का समय बीत जाने के बावजूद सीबीआई को इस मामले में कोई सफलता नहीं मिली है
जबकि इसी मामले में स्थानीय पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तार इस घटना के कथित तौर पर मास्टरमाइंड मनीष रंजन को जमानत मिलने के लिए सीबीआई के तरफ से एडी चोटी का जोर लगाया जा रहा है।
ऐसे में अब आम नागरिक ही यह सवाल उठाने लगे हैं की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का जग भर में अद्भुत नारा देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी देश के गृह मंत्री अमित शाह ने किस मंशा से पटना निट छात्रा बलात्कार और हत्या मामले की जांच सीबीआई को सौंपी हैं।
ज्ञात होकि सीबीआई द्वारा यह मामला अपने हाथ में लेने के बाद शुरुआत से ही अपना लक्ष्य पीड़िता के परिजनों को ही रखा। इन लोगों से लगातार 10 दिनों तक पूछताछ के साथ बेशर्मी भरा मीडिया ट्रायल चलाया। जिसमें मृतक पीड़िता के सहमति से या जबरन संबंध बने। सीबीआई इस एंगल से भी जांच कर रही ऐसी खबरें अखबारों की हेडलाइन बनी।
पीड़िता के परिवार जनों से लगातार 10 दिन तक की गहन पूछताछ के बावजूद सीबीआई को कुछ भी सबूत हाथ नहीं लगा। और अब सीबीआई के पास पीड़िता के परिवार को प्रताड़ित करने या फिर नए ढंग से पूछताछ करने का कोई बहाना नहीं बच गया है।
सीबीआई को यह मामला लिए 20 दिन हो गया है 10 दिन तक पीड़िता के परिवार को प्रताड़ित करने के बाद सीबीआई के पास जैसे कोई काम ही नहीं बचा। क्योंकि इसके बाद सीबीआई कर्मियों ने ना तो इस मामले में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले संबंधित अस्पताल प्रबंधकों से पूछताछ की ना ही विवादित शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका से कडाई से कोई पूछताछ की। क्योंकि इस बाबत कोई खबर मीडिया में नहीं दिखी।
अब सीबीआई अपने साथ चार-चार वकीलों के फौज लेकर इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन को जमानत दिलाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही है। आज 2 मार्च यानी कि सोमवार को सीबीआई के वकील आरोपी मनीष रंजन को जमानत दिलाने के लिए न्यायालय के न्यायाधीश से ही भिड़ गई।
इस मामले में सीबीआई ने माननीय न्यायालय को गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन के निर्दोष होने की बात लिखित रूप से दिया है। जबकि स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज केस डायरी में मनीष रंजन ने शुरुआत में घटना के समय अपने आप को देहरादून में बताया था। जबकि उसका मोबाइल लोकेशन पुलिस के अनुसार पीड़िता के गांव यानी जहानाबाद और फिर शाम को पटना के इसी शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के पास ही था।
पुलिस डायरी में आरोपी मनीष रंजन द्वारा पीड़िता के मोबाइल के व्हाट्सएप चैट डिलीट करने का भी आरोप लगाया गया था। इन सब सबूतो के बावजूद सीबीआई द्वारा कोर्ट में लिखित रूप से देना कि पटना नीट छात्रा बलात्कार एवं हत्या के मामले में मनीष रंजन का कोई संबंध नहीं है,यह सीबीआई की भूमिका को बेहद संदिग्ध बना देता है।
ऐसे में इस मामले से भावनात्मक ढंग से जुड़े पटना और बिहार ही नहीं देश भर के लोग अब सवाल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं की सीबीआई ने इस मामले को कोई नई दिशा तो नहीं दी। अब उक्त संदिग्ध आरोपी को जमानत दिलाने की वकालत करना क्या साबित करता है?
क्या सीबीआई को पटना नीट छात्रा मामले की लीपापोती करने भेजा गया है या पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने???
