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Thursday, October 8, 2026
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बिहार में ‘दो खतियान’ के खेल पर सरकार का ‘हंटर’, फर्जी दावेदारों पर कसेगा शिकंजा

पटना:
बिहार में जमीन विवादों की सबसे बड़ी जड़ यानी ‘दो खतियान’ (कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे) के कारण होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीन पर निजी मालिकाना हक का दावा करने वालों को अब केवल बातों से नहीं, बल्कि ठोस और वैध सबूतों से अपनी बात साबित करनी होगी।

क्या हैं बिहार मे ‘दो खतियान’ का विवाद?

बिहार में जमीन के दो प्रकार के रिकॉर्ड मौजूद हैं:

  • कैडस्ट्रल सर्वे: जो ब्रिटिश काल (पुराना) के दौरान हुआ था।
  • रिविजनल सर्वे: जो स्वतंत्रता के बाद किया गया।

अक्सर देखा गया है कि पुराने सर्वे में जो जमीन ‘सरकारी’ (गैरमजरुआ) थी, उसे नए सर्वे या रिविजनल खतियान के दौरान हेरफेर कर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। इसी ‘दोहरे रिकॉर्ड’ का फायदा उठाकर भू-माफिया और जालसाज सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं और कोर्ट-कचहरी में दावेदारी पेश करते हैं।

प्रधान सचिव का सख्त निर्देश

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को पत्र लिखकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि:

  • ठोस प्रमाण अनिवार्य: यदि कोई व्यक्ति सरकारी भूमि पर अपना हक जताता है, तो उसे ‘स्वामित्व प्रमाण’ (Ownership Proof) पेश करना होगा।
  • नोटिस और जांच: संदिग्ध मामलों में अधिकारियों को तुरंत नोटिस जारी करने और दस्तावेजों की गहन जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
  • अवैध दावों की मनाही: बिना वैध कागजात के किसी भी निजी दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विशेष सर्वेक्षण में आएगी पारदर्शिता

वर्तमान में बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण (Special Survey) का काम चल रहा है। सरकार के इस नए आदेश से सर्वेक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी। अब अधिकारी दोनों खतियानों का मिलान करेंगे और जहाँ भी विसंगति (Mismatch) मिलेगी, वहाँ पुख्ता दस्तावेजों की मांग की जाएगी। इससे सरकारी जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में होने वाले मुकदमों में कमी आएगी।

आम जनता और भू-माफिया पर असर

  • आम जनता: असली मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जिनके पास पुख्ता कागजात नहीं हैं, उन्हें अपनी जमीन की वैधता साबित करने के लिए पुराने रिकॉर्ड (म्यूटेशन, लगान रसीद आदि) दुरुस्त करने होंगे।
  • भू-माफिया: सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझने वाले भू-माफियाओं के लिए यह निर्णय एक बड़ा झटका है। फर्जी कागजातों के सहारे चलने वाला ‘मालिकाना हक’ का खेल अब खत्म होने वाला है।

मुख्य बिंदु

  • मुद्दे की बात: सरकारी जमीन पर अब निजी कब्जा आसान नहीं।
  • नया नियम: दावों के लिए ओनरशिप प्रूफ देना होगा अनिवार्य।
  • लक्ष्य: भूमि विवादों का खात्मा और सरकारी संपत्ति की रक्षा।

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