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Thursday, September 24, 2026
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बिहार सरस मेला: जीविका दीदियों के हुनर को मिल रहा राष्ट्रीय मंच, चार दिन में एक करोड़ से अधिक की बिक्री

बिहार सरस मेला: जीविका दीदियों के हुनर को मिल रहा राष्ट्रीय मंच, चार दिन में एक करोड़ से अधिक की बिक्री

पटना। ज्ञान भवन, पटना में चल रहा बिहार सरस मेला इस बार सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि देश भर की महिला उद्यमियों के लिए एक बड़े राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है। ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति- जीविका द्वारा आयोजित इस मेले में बिहार की जीविका दीदियों के साथ-साथ 15 राज्यों की महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद का वाजिब दाम और भरपूर मान-सम्मान मिल रहा है।

घर की चौखट से राष्ट्रीय बाजार तक: बिहार सरस मेला में 15 राज्यों की महिला उद्यमियों ने पेश की स्वावलंबन की मिसाल

मेले में झारखंड, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मणिपुर, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की महिला उद्यमी अपने स्टॉल लगाकर शिरकत कर रही हैं। मेले में पहली बार बिहार आई महिला उद्यमियों का कहना है कि उनके प्रदेश के शिल्प और स्वाद को इतना सम्मान और मांग शायद ही कहीं और मिलती है।

ज्ञान भवन में 29 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस मेले में परिधान, देसी व्यंजन, घर की सजावट के शिल्प, कलाकृतियां और किचन के सामान समेत हर जरूरत का सामान एक ही छत के नीचे उपलब्ध है। खादी के कपड़े हों, सिक्की-मधुबनी शिल्प हो, अचार-पापड़ हो या मिलेट्स और मखाना, हर स्टॉल पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

राजस्थान की पुष्पा देवी के लोहे के बर्तनों की धूम

मेले में इस बार राजस्थान के चुरू जिले के बारा सर्वदा गांव की पुष्पा देवी का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी पुष्पा देवी पहली बार बिहार सरस मेला में आई हैं। वे अपने हाथों से बनाए लोहे के किचन आइटम – कढ़ाही, तवा, चूल्हा, बेलन, कुकर, कड़छी, चिमटा आदि लेकर आई हैं। लोहे से बने उनके उत्पाद मजबूत, टिकाऊ और किफायती होने के कारण खूब पसंद किए जा रहे हैं।

चार दिन में ही पुष्पा देवी के स्टॉल से ढाई लाख रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हो चुकी है। अकेले बुधवार, 23 सितंबर को उनके स्टॉल से 82 हजार रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। पुष्पा देवी ने बताया कि जीविका द्वारा दिए गए इस मंच से न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ा है।

चार दिन में 1 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

ग्रामीण उत्पादों के प्रति लोगों की दीवानगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेले के चार दिनों में ही खरीद-बिक्री का आंकड़ा 1 करोड़ रुपये को पार कर गया है। मेले के चौथे दिन बुधवार को अकेले 30 लाख 48 हजार रुपये से अधिक का व्यवसाय हुआ और 28 हजार से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया। गुरुवार, 24 सितंबर को पांचवें दिन भी सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचे।

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बिक्री के साथ सीख भी

सरस मेला में सिर्फ खरीद-बिक्री ही नहीं हो रही, बल्कि प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को ज्ञान भवन सभागार में आयोजित संवाद में जीविका दीदियों के उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और विपणन पर गहन मंथन हुआ। बाजार विशेषज्ञों और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दीदियों को पैकेजिंग, लेबलिंग, जीएसटी, ऑनलाइन बिक्री और निर्यात की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार के ग्रामीण उत्पादों में वह दम है कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

ग्राहकों की सुविधा के लिए मेला परिसर में ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किया जा रहा है, जहां रुपये की जमा-निकासी की जा रही है। वहीं सभी स्टॉलों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

कुल मिलाकर यह मेला ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है, जहां हर बिक्री के साथ एक ग्रामीण महिला के आत्मनिर्भर बनने की कहानी जुड़ी है।

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