पटना, 6 अगस्त 2025 —
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति और प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा बिहार चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप अब उन्हीं पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।
ज्ञात हो कि 1 अगस्त 2025 को बिहार चुनाव आयोग ने नई मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसके ठीक अगले दिन, 2 अगस्त को तेजस्वी यादव ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर यह सनसनीखेज दावा किया था कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में मतदाता क्रमांक के साथ प्रमाण भी मीडिया को दिखाया।

लेकिन चुनाव आयोग ने इस बयान को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रतिक्रिया दी और तेजस्वी यादव द्वारा पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग को दिए गए शपथ पत्र (एफिडेविट) को सार्वजनिक कर दिया, जिसमें उनके एक अलग मतदाता क्रमांक का उल्लेख था। यही नहीं, आयोग ने तुरंत पत्र जारी कर उनसे पत्रकार वार्ता में लगाए गए आरोपों का आधार मांगा।
6 अगस्त को जारी ताजा पत्र में भी पटना के निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी ने तेजस्वी यादव से स्पष्ट रूप से 8 अगस्त तक साक्ष्य प्रस्तुत करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि उन्होंने प्रेस वार्ता में जो मतदाता पहचान पत्र दिखाया, उसका मूल एवं विवरण अब तक उपलब्ध नहीं कराया है। इसके अभाव में विस्तृत जांच नहीं की जा सकती है।
हालांकि पत्र में प्रत्यक्ष रूप से कोई चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन चुनाव आयोग की लगातार सक्रियता यह संकेत दे रही है कि तेजस्वी यादव द्वारा की गई गलती को नजरअंदाज करने का कोई इरादा आयोग का नहीं है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि भारतीय चुनाव कानून के अंतर्गत एक व्यक्ति के पास दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र रखना गंभीर अपराध माना जाता है। अगर तेजस्वी यादव समय रहते इस मसले पर उचित जवाब नहीं देते हैं, तो आयोग उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
इस पूरे मामले में जब पत्रकारों ने कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव से चुनाव आयोग के जवाब पर प्रतिक्रिया मांगी थी, तो उन्होंने कहा था— “पहले चुनाव आयोग मेरे सवालों का जवाब दे, फिर मैं जवाब दूंगा।”
इससे साफ है कि तेजस्वी यादव इस मामले पर बचाव की मुद्रा में हैं या उनके पास इस गलती का कोई ठोस जवाब नहीं है।
बहरहाल, पत्राचार और सार्वजनिक बयानबाजी के इस सिलसिले में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि बिहार चुनाव आयोग इस बार चुप बैठने के मूड में नहीं है और तेजस्वी यादव को भी कानून के दायरे में लाने के लिए दृढ़ है।
