Thursday, April 2, 2026
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नूरसराय में महिला से सरेआम दुष्कर्म के प्रयास, वीडियो वायरल, क्या अपराधियों के मन से खत्म हो गया है कानून का खौफ?

नूरसराय (नालंदा): बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय में एक विवाहिता के साथ सरेआम दुष्कर्म के प्रयाससरेआम दुष्कर्म के प्रयास और आरोपियों द्वारा उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की घटना ने एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन यह घटना अपराधियों के उस ‘बुलंद हौसले’ की ओर इशारा करती है, जहाँ उन्हें न तो अपनी सामाजिक छवि की चिंता है और न ही कानून का कोई डर।

बेखौफ अपराधी: न समाज का डर, न कानून का
​बिहार में हाल के दिनों में घटित ऐसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि अपराधियों के मन से पुलिस और कानून का इकबाल खत्म होता जा रहा है। नूरसराय की यह घटना दर्शाती है कि अपराधी अब सरेआम और जघन्य अपराध करने से भी संकोच नहीं कर रहे हैं।

छवि की परवाह नहीं: अपराधी अब इस बात से बेफिक्र हैं कि उनके कुकृत्यों का उनके परिवार या समाज पर क्या असर पड़ेगा। लोक-लाज का भय समाप्त होना सामाजिक पतन का संकेत है।

​जहाँ बिहार पुलिस निरंतर कार्रवाई के दावे करती है, वहीं अपराधियों द्वारा ऐसी दुस्साहसिक वारदातों को अंजाम देना सीधे तौर पर पुलिसिया तंत्र को चुनौती देने जैसा है।

पुलिस की मुस्तैदी बनाम अपराधियों की ढिठाई
​इस मामले में नालंदा पुलिस की भूमिका सराहनीय रही है कि उन्होंने शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन यहाँ एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिलता है: एक तरफ पुलिस की सक्रियता दिखी है, तो दूसरी तरफ अपराधियों की ढिठाई कम होती नहीं दिख रही है। आखिर क्या वजह है कि कड़ी कार्रवाई के बावजूद अपराधियों के मन में ‘कानून का खौफ’ पैदा नहीं हो पा रहा है?

​सोशल मीडिया पर इस खबर के फैलने के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि बिहार में “अपराध राज” चरम पर है। विपक्ष का तर्क है कि जब तक अपराधियों के मन में पुलिस का भय नहीं होगा, तब तक महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं कर सकेंगी।

किसी भी सभ्य समाज में ऐसी घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। केवल गिरफ्तारियां ही काफी नहीं हैं; जरूरत इस बात की है कि न्यायिक प्रक्रिया इतनी तेज और सजा इतनी सख्त हो कि भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसी ‘गंदी हरकत’ करने से पहले सौ बार सोचे। महिला सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सामूहिक प्राथमिकता का विषय होना चाहिए।

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