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Thursday, September 24, 2026
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जमुई के बाद समस्तीपुर में सरेराह युवती से छेड़छाड़, बिहार में कानून-व्यवस्था पर प्रशांत किशोर का करारा प्रहार

जमुई के बाद समस्तीपुर में सरेराह युवती से छेड़छाड़, बिहार में कानून-व्यवस्था पर प्रशांत किशोर का करारा प्रहार

समस्तीपुर, 24 सितंबर (वेब डेस्क)। बिहार में चरमराती कानून-व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। जमुई में छात्रा के साथ हुई बदसलूकी की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि समस्तीपुर में सरेराह एक युवती के साथ छेड़छाड़ और खींचतान का मामला सामने आ गया।

समस्तीपुर दौरे पर पहुंचे प्रशांत किशोर ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक सत्ता का चरित्र और शासन चला रहे लोगों की नीयत नहीं बदलेगी, तब तक बिहार को अपराधमुक्त बनाने का दावा पूरी तरह खोखला है।

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मिली जानकारी के अनुसार, मामला समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र स्थित बायपास मार्ग का है, जहां बेखौफ मनचलों ने एक युवती को घेरकर उसके साथ अभद्रता, मारपीट और खींचतान की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इलाके में सनसनी फैल गई। जमुई की घटना के तुरंत बाद समस्तीपुर में घटी इस वारदात ने प्रदेश में महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक्शन में आई समस्तीपुर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और तकनीकी निगरानी की मदद से चारों नामजद आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS, पॉक्सो (POCSO) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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“अपराधी चला रहे सरकार, कैसे सुरक्षित रहेंगी बेटियां?”

समस्तीपुर की घटना पर आक्रोश जताते हुए प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर राज्य सरकार के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “आज बिहार में अपराधियों का खौफ खत्म हो चुका है। जब सरकार की कमान ही आपराधिक पृष्ठभूमि और अनुभवहीन लोगों के हाथों में होगी, तो प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है? जब तक शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली नहीं बदलेगी, धरातल पर कानून का राज कायम होना नामुमकिन है।”

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  • शिक्षकों और मतदाताओं से अपील: “जाति-धर्म छोड़ बदलाव के लिए करें वोट”

आगामी एमएलसी (MLC) चुनावों का जिक्र करते हुए प्रशांत किशोर ने राज्य के शिक्षकों और आम मतदाताओं से दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 30 सालों से बिहार के शिक्षक और सरकारी कर्मचारी समान काम-समान वेतन, 7वें वेतनमान और गैर-शैक्षणिक कार्यों से आजादी के लिए सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, लेकिन किसी सरकार ने उनकी सुध नहीं ली।

PK ने कहा कि अगर शिक्षक वाकई अपना सम्मान और हक वापस चाहते हैं, तो उन्हें एनडीए (NDA) और राजद-इंडिया (RJD-INDIA) दोनों ही पारंपरिक गठबंधनों का बहिष्कार करना होगा। जब तक जनता जाति और धर्म के नाम पर वोट देती रहेगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना

बेमानी है।

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