साहित्य सम्मेलन में ‘मेरा जीवन, अनुभूतियाँ और विचार’ का लोकार्पण, छात्र-छात्राओं की काव्य-प्रतियोगिता भी आयोजित
पटना, 12 सितम्बर। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में शनिवार को पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह की आत्मकथा ‘मेरा जीवन, अनुभूतियाँ और विचार’ का लोकार्पण किया गया।
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पुस्तक का लोकार्पण करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि अभाव, संघर्ष और श्रम की भट्ठी में तपकर निकले व्यक्तियों का जीवन स्वर्ण की तरह चमकता है और उनकी जीवनी समाज के लिए प्रेरणादायी होती है। न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह का जीवन ऐसी ही संघर्षपूर्ण और श्रमसाध्य उपलब्धियों से भरा है।
उन्होंने कहा कि गंगा के कटाव वाले एक सुदूर गांव में एक सीमांत किसान के पुत्र के रूप में जन्म लेकर, खेतों में काम करते हुए पढ़ाई पूरी करने वाले श्री सिंह अपने गांव के प्रथम स्नातक, प्रथम अधिवक्ता और जिला न्यायालय से उच्च न्यायालय तक पहुंचने वाले प्रथम न्यायाधीश बने। उन्होंने अपने कुल का गौरव बढ़ाया है। रामचरितमानस से अनुप्राणित लेखक ने इस आत्मकथा में मानस के मर्म को समझने-समझाने की भी चेष्टा की है। यह पुस्तक पठनीय और अनुकरणीय है।
समारोह के मुख्य अतिथि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने कहा कि ऐसी पुस्तकें छात्र-छात्राओं को जीवन के संघर्षों से उबरने की शक्ति देती हैं। सुप्रसिद्ध लेखिका किरण सिंह ने कहा कि लेखक ने अपने कठिन काल के अनुभवों को एक न्यायाधीश की तरह सत्य और निष्ठा के साथ लिखा है, सत्यता और सरलता ही इस पुस्तक की विशेषता है।
समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रत्नेश्वर सिंह, अवकाश प्राप्त अभियंता भोला सिंह, लेखक की धर्मपत्नी देवंती सिंह, कवयित्री आराधना प्रसाद और इंजीनियर अशोक कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। मंच संचालन कवि ब्रह्मानंद पांडेय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
इस अवसर पर लेखक के पुत्र जिला जज माधवेंद्र सिंह, अधिवक्ता पुत्र राघवेंद्र सिंह, व्याख्याता पुत्र यादवेंद्र सिंह, पुत्रवधुएं प्रियंका सिंह, शिल्पी कुमारी, डॉ. ज्योति, आचार्य विजय गुंजन, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, डॉ. पुष्पा जमुआर, पं. उमेश मिश्र, विभा रानी श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
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70 से अधिक विद्यार्थियों ने की काव्य-पाठ में भागीदारी
इसी अवसर पर विद्यार्थियों के लिए काव्य-पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें डॉन बॉस्को एकेडमी दीघा, शिवम कॉन्वेंट न्यू बाईपास, किलकारी बिहार बाल भवन सैदपुर, इन्फैंट जीसस स्कूल पटना सिटी, सेंट जॉन्स पब्लिक हाई स्कूल कदमकुआं, गोकुल जगत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तरियानी शिवहर और गंगस्थली दीघा सहित विभिन्न विद्यालयों के 70 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
