Friday, September 11, 2026
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राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह को उनकी जयंती पर किया गया नमन, ‘शैली-सम्राट’ के साहित्यिक अवदान को किया गया याद

पटना, 10 सितम्बर। हिंदी कथा-साहित्य में ‘शैली-सम्राट’ के रूप में प्रतिष्ठित महान कथा-शिल्पी राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह को उनकी जयंती पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

सम्मेलन भवन में आयोजित जयंती समारोह, पत्रिका लोकार्पण एवं लघुकथा-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि राजा जी ने कथा-लेखन की अपनी लुभावनी शैली से पाठकों को दीवाना बना लिया था। उनकी कहानियाँ अपनी नज़ाकत भरी भाषा और रोचक चित्रण के कारण पाठकों को मोहित करती हैं।

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डॉ. सुलभ ने कहा, “कहानी किस प्रकार पाठकों को आरंभ से अंत तक पढ़ने के लिए विवश कर सकती है, इस शिल्प को वो जान गए थे। इसीलिए वे अपने समय के सबसे लोकप्रिय कहानीकार सिद्ध हुए। उनकी झरना-सी मचलती हुई बहती, शोख़ और चुलबुली भाषा ने पाठकों को दीवाना बना दिया था। उन्होंने अपनी कहानियों में समय के सत्य, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को सर्वोच्च स्थान दिया।”

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उन्होंने कहा कि राजा जी हिन्दू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के बड़े पक्षधर थे। अपनी भाषा में भी उन्होंने इसका ठोस परिचय दिया। उनकी कहानियों में उर्दू के पर्याप्त शब्द मिलते हैं। गांधी जी के आंदोलन में सक्रिय रहने के दौरान, गांधी जी की ही प्रेरणा से उन्होंने अपनी कहानियों में गंगा-जमुनी भाषा का प्रयोग किया। ‘राम-रहीम’, ‘कानों में कंगना’, ‘माया मिली न राम’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘गांधी टोपी’, ‘नारी क्या एक पहेली’, ‘वे और हम’, ‘तब और अब’, ‘बिखरे मोती’ जैसी उनकी कालजयी रचनाओं में इसकी ख़ूबसूरत छटा देखी जा सकती है।

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. समरेंद्र नारायण आर्य, डॉ. पूनम आनंद, डॉ. पुष्पा जमुआर, विभारानी श्रीवास्तव, शमा कौसर ‘शमा’, इंदु भूषण सहाय और मनोज उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किए और राजा जी के साहित्यिक अवदानों को याद किया।

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पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ के विशेषांक का लोकार्पण

इस अवसर पर प्रयागराज से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ के, बिहार की साहित्यकार डॉ. पूनम आनंद के साहित्य पर केंद्रित विशेष अंक का लोकार्पण भी किया गया। वक्ताओं ने इस उपलब्धि के लिए डॉ. आनंद को बधाई दी।

लघुकथा-गोष्ठी में गूंजे समसामयिक सरोकार

जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित लघुकथा-गोष्ठी में कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। अभिराम बुद्धवाहा ने ‘कबीर का लोटा’, डॉ. पुष्पा जमुआर ने ‘मेरे लिए’, डॉ. पूनम आनंद ने ‘व्यापार’, विभारानी श्रीवास्तव ने ‘उत्तराधिकारी’, शमा कौसर ‘शमा’ ने ‘असली दौलत’, मनोज उपाध्याय ने ‘दहेज’, इंदु भूषण सहाय ने ‘अहंकार हारा’, अनुराग कुमार ने ‘भिखारी’, अमितेश राज ने ‘स्वच्छ पानी’ तथा कुमार इप्सित ने ‘भविष्य’ शीर्षक से लघुकथा सुनाई।

मंच का संचालन ब्रह्मानंद पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कृष्णरंजन सिंह ने किया।

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पुस्तक-चौदस मेले में उमड़े पुस्तक प्रेमी

उधर, हिंदी-पखवाड़ा के अंतर्गत सम्मेलन में चल रहे पुस्तक-चौदस-मेला में पुस्तक-प्रेमियों की अच्छी उपस्थिति देखी गई। भगवान श्रीराम का जन्म-वर्ष बताने वाली पुस्तक ‘रामायण परिपथ बिहार’, ‘हिन्दी के प्रणम्य पुरुष’, ‘पावन चरित डॉ. राजेंद्र प्रसाद’ आदि पुस्तकों के साथ-साथ कई दुर्लभ पुस्तकों की प्रदर्शनी पाठकों का ध्यान खींच रही है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की दीर्घा पर भी पाठकों की भीड़ देखी जा रही है।

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