भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अपने विधायक की बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर राज्यसभा में जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी। और पिछले एक महीने के अंदर ही घटे घटनाक्रम में यहां चुनाव की घोषणा के साथ 30 जुलाई को यहां मतदान भी कमो-वेश शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और कल सोमवार को यहां मतगणना है यानी दोपहर तक चुनाव परिणाम भी घोषित हो जाएंगे।
लेकिन चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ मतदान के बाद की स्थिति ऐसी बनी है जिसमें भाजपा नेतृत्व ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि यह सीट प्रशांत किशोर जीत सकती हैं। और इसी के तहत प्रशासनिक हस्तक्षेप कर जनसुराज पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं को हर तरह से परेशान किए जाने का आरोप निरंतर जनसुराज के तरफ से किया जाता रहा है।
चुनाव की तारीख के घोषणा के साथ ही जनसूराज के अनेक बड़े नेताओं को भाजपा में प्रवेश दिलाना, उम्मीदवार प्रशांत किशोर को बदनाम करने वाले पोस्टर पटना शहर में लगवाना, देश और राज्य भर से प्रचार प्रसार करने वाले जनसुराज के कार्यकर्ताओं के होटल व घर पर जाकर परेशान करना,
और चुनाव मतदान के ठीक पहले रात में ही जनसूराज के महत्वपूर्ण 36 प्रमुख कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों से गिरफ्तारी से यह साफ दिख रहा है की राज्य की सत्ताधारी दल भाजपा अपने उम्मीदवार नीरज सिन्हा के जीत के प्रति अस्वस्थ नहीं है और इसीलिए अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार प्रशांत किशोर को हर तरह से परेशान किया गया।
और सबसे महत्वपूर्ण बात तो भाजपा प्रवक्ताओं ने चुनाव मतदान के अगले दिन कहीं। जिसमें यह साफ दिख रहा है कि भाजपा नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि बांकीपुर विधानसभा सीट से प्रशांत किशोर ही जीत रहे हैं। क्योंकि चुनाव मतदान के बाद भाजपा के अनेक प्रवक्ताओं ने मीडिया के सामने कहा की जनसराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर यह चुनाव लड़ा है।
भाजपा प्रवक्ताओं का यह वक्तव्य यह साफ दिखलाता है की भाजपा नेतृत्व को यह भरोसा हो गया है कि इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत असंभव है और यहां से जीत प्रशांत किशोर की होगी और अपने हार का ठीकरा जनसुराज पर फोड़ने के लिए उन्होंने यह बयान बाजी की है।
हालांकि इस चुनाव में कौन जीतेगा और कौन हारेगा यह बातें तो अभी बैलेट बॉक्स में बंद है। और चुनाव परिणाम की घोषणा भी कल सोमवार दोपहर तक होनी है लेकिन अगर यहां से जनसुरज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर की जीत होती है
तो निश्चित तौर पर पूरे भारत में के साथ बिहार में एक नए दौर। की शुरुआत होगी। जिसमें यह संदेश जाएगा की बिहार के लोग अब सिर्फ जाति और बड़ी-बड़ी पार्टियों को देखकर मतदान नहीं करते बल्कि वे अब अपनी अच्छाई और बुराई को सोचकर समझकर मतदान करते हैं।
