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Saturday, October 24, 2026
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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष की फजीहत कराने में क्यों लगी है भाजपा?

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है। वजह सिर्फ चुनाव होना नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी और खुद को ‘कैडर-बेस्ड’ कहने वाली पार्टी भाजपा की वह रणनीतिक गफलत है, जो अब उसके गले की फांस बनती दिख रही है।

सवाल उठने लगा है कि जो भाजपा साल के 365 दिन चुनावी मोड में रहती है, वह अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के गृह क्षेत्र में इतनी बड़ी चूक कैसे कर बैठी? क्या भाजपा खुद ही अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की राजनीतिक फजीहत कराने की स्क्रिप्ट लिख रही है?

​साख की लड़ाई: नितिन नवीन की विरासत दांव पर

​बांकीपुर सीट भाजपा का गढ़ रही है, और यहां से लगातार जीत दर्ज करने वाले नितिन नवीन को हाल ही में पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपने के साथ राज्यसभा सांसद भी बनाया। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर आगामी 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होनी है।

चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक 13 जुलाई को नामांकन की आखिरी तारीख थी, लेकिन नामांकन के इस आखिरी दौर ने भाजपा की चुनावी रणनीति की कलई खोलकर रख दी।

​’अभिषेक बंटी’ एपिसोड: भाजपा के इतिहास की अभूतपूर्व घटना

​भाजपा ने जातीय समीकरण और स्थानीय पकड़ को देखते हुए कायस्थ समाज के अभिषेक कुमार बंटी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। अभिषेक बंटी ने गाजे-बाजे और भारी लाव-लश्कर के साथ पर्चा भी दाखिल कर दिया।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया। नामांकन के चंद घंटों के भीतर ही बंटी ने “पारिवारिक कारणों” का हवाला देते हुए मैदान से हटने की घोषणा कर दी।

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक ही दिन के भीतर बंटी को लेकर कई तरह की अफवाहें और गंभीर आरोप हवा में तैरने लगे—चाहे वह उनके पिता का पुराना चारा घोटाला कनेक्शन हो, या उनके कुछ कथित आपत्तिजनक वीडियो और चरित्र को लेकर उड़े सवाल।

शाम होते-होते उम्मीदवार ने घुटने टेक दिए। टिकट घोषणा और नामांकन के तुरंत बाद उम्मीदवार का इस तरह पीछे हट जाना शायद भाजपा के राजनीतिक इतिहास की पहली और सबसे अप्रत्याशित घटना है।

​राष्ट्रीय अध्यक्ष की पसंद पर सवाल और शुरुआती विफलता

​पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो अभिषेक बंटी खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली पसंद थे। बंटी का निजी जनसंपर्क और नितिन नवीन का इस क्षेत्र में पुराना रसूख मिलकर इस सीट को भाजपा की झोली में सुरक्षित मान रहा था।

लेकिन बिना किसी ठोस बैकग्राउंड चेक और ‘विपक्ष के हमलों’ का अंदाजा लगाए बिना उम्मीदवार घोषित कर देना भाजपा के थिंक-टैंक पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​कल सोमवार को खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र की जमीन पर उतरना पड़ा। वे डैमेज कंट्रोल और बिखरते चुनावी समीकरणों को जोड़ने की जद्दोजहद में जुटे दिखे, जो यह साफ करता है कि स्थिति उनके हाथ से फिसलती नजर आ रही है।

​विपक्ष हमलावर: सोशल मीडिया पर पिछड़ती भाजपा

​भाजपा ने आनन-फानन में अब नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार बनाया है, लेकिन तब तक तीर कमान से छूट चुका था। राजद और जन सुराज जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने भाजपा की इस शुरुआती गफलत और ‘यू-टर्न’ को सोशल मीडिया पर एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। विपक्ष इसे भाजपा की घबराहट और आंतरिक कलह के रूप में पेश कर रहा है।

​नतीजतन, नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को जमीन पर प्रचार शुरू करने से पहले ही रक्षात्मक (defensive) रुख अपनाना पड़ रहा है। नैरेटिव की इस जंग में फिलहाल भाजपा बैकफुट पर दिख रही है।

​निष्कर्ष: फजीहत रोकने की बड़ी चुनौती

​बांकीपुर का यह उपचुनाव अब महज एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, यह सीधे तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा की परीक्षा है।

अगर भाजपा अपनी इस शुरुआती नाकामी से उबरकर जमीन पर वोटर्स का भरोसा तुरंत बहाल नहीं कर पाती है, तो नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी। और अगर इस गढ़ में कोई उलटफेर हुआ, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष की जो फजीहत होगी, उसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी।

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