Sunday, June 14, 2026
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रिशु श्रीऔर BPSC परीक्षा विवाद पर जन सुराज का तीखा हमला, न्यायिक जांच के लिए राष्ट्रपति, PM और CM को लिखा पत्र

पटना। बिहार की प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर जन सुराज पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। रविवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के शीर्ष नेताओं ने राज्य में हाल ही में उजागर हुए टेंडर घोटाले और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में ब्लैकलिस्टेड कंपनियों की संलिप्तता को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

​इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जन सुराज ने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।

1. रिशु श्री और टेंडर घोटाला: “FIR के बाद कार्रवाई में एक साल की देरी क्यों?”

​प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बिहार में सामने आए टेंडर घोटाले पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मामले ने राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

अध्यक्ष मनोज भारती ने उठाए ये बड़े सवाल:

गिरफ्तारी और विफलता: हाल के दिनों में पूर्व आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, पूर्व मुख्य अभियंता तारणी दास, उमेश कुमार सिंह और बिचौलिया रिशु श्री की गिरफ्तारी से साफ है कि विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी चल रही थी।

एक साल की सुस्ती पर घेरा: मनोज भारती ने सबसे गंभीर सवाल यह उठाया कि जब इस पूरे मामले में अप्रैल 2025 में ही एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी थी, तो इतनी बड़ी कार्रवाई करने में प्रशासन को लगभग एक वर्ष का समय क्यों लग गया? इस प्रशासनिक सुस्ती की भी गहन जांच होनी चाहिए।

हाईकोर्ट की टिप्पणी का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि पटना हाईकोर्ट ने भी इस मामले में हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर वित्तीय आरोपों को देखते हुए एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता जताई है।

जन सुराज की मांग: टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, गोपनीय दस्तावेजों का दुरुपयोग, दागी अधिकारियों के परिजनों की विदेश यात्राओं, अवैध संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि इस पूरे खेल के ‘वास्तविक लाभार्थी’ (Real Beneficiaries) आखिर कौन हैं?

2. “यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, संस्थाओं की साख का मामला”

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि जन सुराज का यह स्पष्ट मानना है कि यह मामला केवल कुछ रुपयों के भ्रष्टाचार का नहीं है। यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे और बिहार की सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। सरकारी तंत्र की गिरती साख को बचाने के लिए ही पार्टी ने देश के सर्वोच्च नेतृत्व (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री) को पत्र लिखकर न्यायिक निगरानी (Judicial Oversight) में जांच की मांग उठाई है।

3. BPSC परीक्षा और ब्लैकलिस्टेड कंपनी का खेल: युवाओं के भविष्य से खिलवाड़?

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा जन सुराज के प्रवक्ता कुमार सौरभ ने किया। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं की शुचिता पर सीधे सवाल उठाए।

‘साईं एडूकेयर’ कंपनी को लेकर बड़े खुलासे:

पहले से दागी थी कंपनी: प्रवक्ता कुमार सौरभ ने बताया कि बिहार में 16 से 21 अप्रैल के बीच लगभग 700 केंद्रों पर आयोजित BPSC की AEDO परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जयपुर स्थित कंपनी ‘साईं एडूकेयर’ को 25 अक्टूबर 2025 को ही गुजरात हाईकोर्ट की परीक्षा में कथित गंभीर अनियमितताओं के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसके अलावा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा भी इस कंपनी को प्रतिबंधित (ब्लैकलिस्ट) किया गया था।

बिहार में किसने दी जिम्मेदारी?: जन सुराज ने सरकार से तीखा सवाल पूछा कि आखिर किन लोगों और अधिकारियों के संरक्षण में एक देशव्यापी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को बिहार लोक सेवा आयोग जैसी प्रतिष्ठित संस्था की परीक्षा के बायोमेट्रिक सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंप दी गई?

सिस्टम के दुरुपयोग का आरोप: कुमार सौरभ ने आरोप लगाया कि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा गिरफ्तार किए गए कुछ लोग इसी कंपनी से जुड़े थे और AEDO परीक्षा में शामिल हुए थे। जिस बायोमेट्रिक प्रणाली की सुरक्षा की जिम्मेदारी इस कंपनी के पास थी, उसी का दुरुपयोग कर कथित रूप से प्रश्नपत्र बाहर भेजे गए और उत्तर-पुस्तिकाओं से संबंधित गोपनीय जानकारियां लीक की गईं।

कुमार सौरभ का सरकार से सवाल: “बिहार के युवाओं को यह भरोसा कैसे दिलाया जाए कि बीपीएससी द्वारा भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में कोई अनियमितता नहीं होगी? आज साईं एडूकेयर है, कल कोई दूसरी कंपनी हो सकती है। इस मामले में बीपीएससी के अध्यक्ष और शिक्षा विभाग के सचिव की जवाबदेही कब तय होगा।

​जन सुराज की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र ने बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां टेंडर घोटाले में नौकरशाही के बड़े नाम सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीपीएससी की परीक्षा में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को टेंडर दिए जाने के खुलासे ने लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य और सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी समय में इन मुद्दों को लेकर विपक्ष और जन सुराज का रुख नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ के नारे के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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