Saturday, May 9, 2026
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पटना: बांस घाट श्मशान की कमान अब ईशा फाउंडेशन के हाथों में, नगर निगम के साथ हुआ MoU

पटना | 8 मई, 2026

​बिहार की राजधानी पटना में अंतिम संस्कार सेवाओं को अधिक गरिमामय, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पटना नगर निगम (PMC) ने सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन की इकाई ‘ईशा आउटरीच’ के साथ ऐतिहासिक समझौता किया है। इस समझौते के तहत अब पटना के ऐतिहासिक बांस घाट श्मशान के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ईशा आउटरीच संभालेगी।

​शुक्रवार को नगर आयुक्त श्री यशपाल मीणा की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। निगम की ओर से नगर अभियंता श्री बिंदु रजक और ईशा आउटरीच की ओर से श्री युवराजन ने दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बदला स्वरूप

​बांस घाट श्मशान का विकास पटना स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बुडको (BUIDCO) द्वारा किया गया है। 16 अप्रैल 2026 को पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के बाद, नवनिर्मित और उन्नत सुविधाओं वाले इस परिसर को नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया गया था। अब विशेषज्ञता और बेहतर प्रबंधन के लिए इसे ईशा फाउंडेशन को सौंपा गया है।

विश्व स्तरीय मिलेंगी सुविधाएं

​समझौते के अनुसार, अगले 5 वर्षों तक ईशा आउटरीच परिसर की निम्नलिखित व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेगी:

  • आधुनिक दाह प्रणाली: इलेक्ट्रिक शवदाह गृह और चिमनीयुक्त लकड़ी आधारित दाह प्रणाली का संचालन।
  • बुनियादी ढांचा: प्रार्थना कक्ष, प्रतीक्षा हॉल, गंगा जल भंडारण संरचनाएं और कर्मचारी आवास का रखरखाव।
  • वैज्ञानिक प्रबंधन: रिकॉर्ड प्रबंधन के साथ-साथ अपशिष्ट (वेस्ट), राख और सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से निपटान।
  • जन-सुविधाएं: परिसर में सफाई, बिजली शुल्क का भुगतान और अन्य नागरिक सुविधाओं को सुनिश्चित करना।

क्या होगी शुल्क संरचना?

​अंतिम संस्कार सेवाओं के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। प्रस्तावित शुल्क ₹3,500 से ₹5,000 के बीच रखा गया है, जिसे आपसी सहमति से संशोधित किया जा सकेगा। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक शवदाह प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। लकड़ी आधारित दाह संस्कार के मामले में लकड़ी का खर्च परिजनों को वहन करना होगा।

​नगर निगम का मानना है कि ईशा फाउंडेशन जैसी संस्था के जुड़ने से न केवल नागरिकों को सम्मानजनक सेवाएं मिलेंगी, बल्कि यह मॉडल पूरे राज्य के लिए स्वच्छता और तकनीक के समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा।

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