नई दिल्ली: दिल्ली में बिहारी युवक पांडव की निर्मम हत्या के विरोध में आज राजधानी का जंतर-मंतर राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश का केंद्र बन गया। जन सुराज पार्टी के बैनर तले आयोजित इस विशाल विरोध-प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न कोनों से आए बिहारी समाज के हजारों लोगों ने शिरकत की। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जन सुराज के प्रवक्ता विवेक कुमार ने दिल्ली में बिहारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “दिल्ली की कुल आबादी में एक तिहाई हिस्सेदारी रखने के बावजूद बिहारियों को आए दिन अपमान, शोषण और हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
दिल्ली पुलिस के एक कर्मी द्वारा केवल ‘बिहारी’ पहचान के आधार पर पांडव की हत्या करना यह दर्शाता है कि राजधानी में हमारे समाज की स्थिति कितनी संवेदनशील है।”
जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी नेता अनूप मैथिल और आदित्य मोहन ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख शर्तें रखीं:पांडव हत्याकांड की जांच दिल्ली पुलिस के बजाय एक स्वतंत्र एसआईटी (SIT) से कराई जाए।
पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का सरकारी मुआवजा तत्काल दिया जाए।परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
नेताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के बाद संवेदनशीलता दिखाने के बजाय पीड़ित परिवार को सचिवालय बुलाना दुर्भाग्यपूर्ण है।प्रवक्ता अक्षत सोनक ने कहा कि बिहारी समाज अपनी मेहनत से राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है, लेकिन बदले में उन्हें केवल तिरस्कार मिल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जन सुराज अब बिहारियों के साथ हो रहे इस भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा और यह संघर्ष न्याय मिलने तक जारी रहेगा।
प्रदर्शन के अंत में जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर धीरू मिश्रा, शांतनु, चंद्रजीत, रिचा और प्रभात समेत कई प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे।
