राजेश सिन्हा
बिहार में अगर कहा जाए कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। और उन्हें सरेआम अपराध करने में थोड़ी भी हिचक नहीं दिख रही है। वही अगर कहा जाए कि बिहार भर के लोगों में संवेदना खत्म होती जा रही तो इस बात में सौ प्रतिशत सच्चाई दिख रही है।
एक तरफ अपराधी सरेआम बीच बाजार में हथियार लहराते हुए और गोलियां चलाते हुए लुट और हत्या जैसी गंभीर अपराधों को अंजाम दें रहे हैं वही वहां उपस्थित लोग मूक दर्शक की भूमिका में रहते है। और अनेक मामलों में मोबाइल से घटना की लाइव रिकॉर्डिंग करते दिखते है।
पटना के रामकृष्णानगर में पिछले दिनों दिनदहाड़े बेखौफ अपराधियों द्वारा ज्वेलर्स दुकान में लूट और सीवान में सरेबाजार अपराधियों द्वारा मामूली विवाद पर MLC के भांजे की गोली मारकर हत्या में आम लोगों द्वारा मध्यस्थता नहीं करना, मूक दर्शक बने रहना और वीडियो बनाते दिखना उनकी संवेदनहीनता दिखाता है।
नालंदा में लगभग एक माह पहले एक महिला के साथ सरेबाजार दुष्कर्म का प्रयास, उसका वीडियो बनाया जाना और वहां उपस्थित लोगों की मूकदर्शक की भूमिका भी लोगों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताता है।
अभी कल पटना गया रेलवे लाइन के बीच स्थित चाकंद और बेला रेलवे स्टेशन के बीच बेखौफ पांच अपराधियों ने ट्रेन की चेन पुलिंग की। और उस ट्रेन में बैठी युवती को जबरन सुनसान जगह ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने इस बारे में बेलागंज थाना में शिकायत दर्ज की है।
बेलागंज डीएसपी रवि प्रकाश सिंह ने इस मामले की पुष्टि करते हुए इसकी गंभीरता से जांच करने की बात की हैं। लेकिन यहां फिर वही सवाल वहां ट्रेन में वारदात के दौरान उपस्थित आम लोगों के लिए बनता है।
एक लड़की को जबरन पांच अपराधी ट्रेन से घसीटते हुए सभी यात्रियों के बीच से ट्रेन से उतार लेते है। और लोग मूकदर्शक।
कैसे मर गई उनकी संवेदना?
क्यों नहीं रोका उन अपराधियों को?
क्या उनके घर के किसी बच्ची के साथ ऐसी घटना होती तो भी क्या वे मूकदर्शक बने रहते?
अक्सर ऐसे मामलों में लोगों का तर्क होता है कि अपराधियों के पास आग्नेय हथियार होते है। और इन मामलों में हस्तक्षेप पर जान जाने का डर रहता है।
लेकिन ऐसे ज्यादातर मामलों में आम लोगों का विरोध धुरंधर अपराधियों को सावधान कर देते है। और आम लोगों के विरोध के बाद अनेक मामलों में अपराधियों के भागने के भी उदाहरण है।
और ऐसे मानवता को शर्मसार करने वाले मामलों में आम लोगों की जान जाने के डर से चुप्पी के बाद क्या वे लोग अपने आपको जिंदा समझते है?
