पटना (बाढ़)। उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से पूर्व सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह ने रामनवमी के पावन अवसर पर बिहार की धरती से एक ऐसा राजनीतिक विमर्श छेड़ा है, जिसकी गूँज दिल्ली तक सुनाई दे रही है।
पटना के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए ‘सवर्ण’ समाज की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए।
“मुसलमानों के साथ सब, सवर्णों के साथ कौन?”
बृजभूषण शरण सिंह ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए एक ऐसी तुलना पेश की जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा:विपक्ष पर तंज: उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों का साथ देने के लिए भाजपा को छोड़कर देश की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां खड़ी हैं।
सवर्णों की बेबसी: उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से सीधा सवाल किया— “सवर्णों के साथ कौन सी पार्टी खड़ी है, हमें बता दीजिए?” जब जनता की ओर से जवाब आया— ‘कोई नहीं’, तब उन्होंने जोर देकर कहा कि यही कारण है कि आज सवर्ण समाज ‘खलनायक’ की स्थिति में खड़ा कर दिया गया है।
अपनी ही पार्टी भाजपा पर इशारों में निशाना: हैरानी की बात यह रही कि वरिष्ठ भाजपा नेता होते हुए भी उन्होंने इशारों-इशारों में UGC बिल जैसे मुद्दों को लेकर अपनी ही सरकार (भाजपा) को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
उन्होंने सवर्णों को ‘खलनायक’ कहकर संबोधित किया, जिसका अर्थ उनके इस तर्क से था कि जिस वर्ग का कोई राजनीतिक पैरोकार नहीं होता, उसे ही दोषी ठहराना सबसे आसान हो जाता है।
शेरो-शायरी और सामाजिक एकजुटता का आह्वान: संबोधन के दौरान उन्होंने एक भावुक शेर भी पढ़ा:
“इतने गहरे घाव कहां से आए होंगे,
लगता है तुमने भी दोस्त बनाए होंगे”
इसे सवर्णों की वर्तमान हालत से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अब शर्म छोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बनाना होगा। उन्होंने ‘सभी को साथ जोड़ने’ की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रभु श्री राम के ‘समावेशी’ चरित्र का हवाला: अपने भाषण के अंत में उन्होंने रामनवमी की सार्थकता को प्रभु श्री राम के जीवन दर्शन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने ऋषि भारद्वाज से लेकर आदिवासी, केवट और जंगलवासियों तक, सबको साथ जोड़ा था। उनका चरित्र हमें यही प्रेरणा देता है कि जो भी हमारे साथ चलने को तैयार है, उसे साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
