Tuesday, March 17, 2026
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26 सांसदों वाला गुजरात ‘फैक्ट्री मालिक’ और 40 वाला बिहार ‘मजदूर’: प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

भोजपुर | 16 मार्च 2026 जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार की राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर तीखा प्रहार किया है। भोजपुर में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने राज्यसभा चुनावों से लेकर बिहार के पिछड़ेपन और मतदाताओं की जिम्मेदारी पर बेबाक राय रखी।

​”सांसदों की इतनी भी नहीं चलती कि ट्रेन रुकवा सकें”
​राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों से बिहार की जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली। तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “बिहार से जो लोग चुनाव जीतकर जाते हैं, उनकी दिल्ली में इतनी हैसियत भी नहीं होती कि वे अपने क्षेत्र के लिए एक ट्रेन का स्टॉपेज (स्टेशन पर ठहराव) तक करवा सकें।”

​गुजरात बनाम बिहार: मालिक और मजदूर का फर्क
​विकास के पैमाने पर बिहार की तुलना गुजरात से करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि महज 26 सांसदों वाले गुजरात के लोग देशभर में फैक्ट्रियों के मालिक बने बैठे हैं, जबकि 40 सांसदों वाले बिहार के लोग आज भी दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने इसके लिए बिहार के नेतृत्व और प्रतिनिधित्व की विफलता को जिम्मेदार ठहराया।

“तिजोरी खोलकर खरीदे गए 60-70 हजार वोट”
​हालिया चुनावों को ‘अजूबा’ करार देते हुए प्रशांत किशोर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बिहार के चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा देखा गया जहां सरकार ने सीधे तौर पर सरकारी तिजोरी का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 हजार वोट पैसे बांटकर खरीदे गए हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना को ठेस पहुंची है।

​प्रशांत किशोर ने केवल नेताओं को ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी आईना दिखाया। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक मतदाता तात्कालिक लाभ या पैसे के बदले अपना वोट देते रहेंगे, तब तक बिहार की स्थिति में सुधार की उम्मीद बेमानी है।

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