Tuesday, February 24, 2026
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फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई: सगे भाई को ‘मृत’ बताकर नौकरी बचाने की कोशिश नाकाम, पटना के अंचल अधिकारी प्रिंस राज चयनमुक्त

पटना, 24 फरवरी, 2026: बिहार में सरकारी सेवा में अभिलेखों की सत्यता और भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सुपौल सदर के निलंबित अंचल अधिकारी (CO) प्रिंस राज को सेवा से चयनमुक्त (बरखास्त) कर दिया है। प्रिंस राज पर दो अलग-अलग पहचानों के सहारे परीक्षा उत्तीर्ण करने और विभाग को गुमराह करने का गंभीर आरोप सिद्ध हुआ है।

क्या है पूरा मामला?: पूरा विवाद 60वीं-62वीं बीपीएससी परीक्षा से चयनित अधिकारी प्रिंस राज की शैक्षणिक योग्यता और पहचान से जुड़ा है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि:2004 में: ‘धर्मेंद्र कुमार’ के नाम से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण की गई।

2006 में: ‘प्रिंस राज’ के नाम से अलग जन्मतिथि का उपयोग कर पुनः माध्यमिक परीक्षा पास की गई।

जब विभाग ने इस विसंगति पर स्पष्टीकरण मांगा, तो प्रिंस राज ने दावा किया कि ‘धर्मेंद्र कुमार’ उनके सगे भाई थे, जिनका निधन हो चुका है।

उन्होंने खुद को धर्मेंद्र कुमार से अलग व्यक्ति बताने की कोशिश की।

‘मृत भाई’ का प्रमाण नहीं दे सके अधिकारी: विभागीय कार्रवाई का निर्णायक मोड़ तब आया जब विभाग ने प्रिंस राज से उनके कथित मृत भाई का मृत्यु प्रमाण-पत्र मांगा। विभाग ने मृत्यु की तिथि, स्थान और परिस्थितियों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज पेश करने का पर्याप्त समय दिया, लेकिन प्रिंस राज कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहे।

इसी बीच बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा के उनके अंक-पत्र और प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया, जिससे शैक्षणिक धोखाधड़ी की पुष्टि हो गई।

बीपीएससी की सहमति के बाद सख्त कार्रवाई: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस पूरे प्रकरण पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से मंतव्य मांगा था। आयोग ने स्पष्ट किया कि विभाग निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अधिकारी को चयनमुक्त करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति मिलते ही प्रिंस राज को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

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