Sunday, March 22, 2026
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सारण निर्भया मामला: दो फीट पानी के कुएं में मौत का दावा, अधिवक्ता डॉ. कौशलेंद्र नारायण ने उठाए गंभीर सवाल

सारण/पटना: सारण जिले के डेरनी थाना अंतर्गत पट्टीशीतल गांव में घटित ‘निर्भया’ हत्याकांड ने मानवीय संवेदनाओं और पुलिसिया दावों पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। रविवार को पटना हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. कौशलेंद्र नारायण ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने प्रशासन के “कुएं में कूदकर आत्महत्या” वाले नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया है।

“दो फीट पानी में मौत मुमकिन नहीं”
घटनास्थल का मुआयना करने के बाद डॉ. नारायण ने कहा, “जिस कुएं में निर्भया के गिरने की बात कही जा रही है, उसमें बमुश्किल दो फीट पानी है। दो फीट पानी में कूदने से किसी की मृत्यु नहीं हो सकती; अधिक से अधिक हड्डी टूट सकती है। यह स्पष्ट रूप से दरिंदगी और हत्या का मामला प्रतीत होता है जिसे छुपाने की कोशिश की जा रही है।” उन्होंने उस आंगन और घर का भी निरीक्षण किया जहाँ जलावन लाने गई निर्भया के साथ हैवानियत को अंजाम दिया गया था।

गरीबी का अभिशाप और प्रशासनिक उदासीनता
अधिवक्ता डॉ. नारायण ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सवर्ण समाज में जन्म लेने के बावजूद निर्भया का परिवार अत्यंत निर्धन है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज के दौर में ‘गरीब होना भी एक अभिशाप है’, क्योंकि अक्सर समाज और रसूखदार लोग ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे नहीं आते।

प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस ने निर्भया के पिता का मोबाइल बिना किसी ‘पंचनामा’ के जब्त कर लिया है और उसे अब तक वापस नहीं किया गया है। उन्होंने पूछा कि आखिर प्रशासन इस गरीब परिवार के साथ ऐसा रवैया क्यों अपना रहा है?

निजी कोष से 50 हजार की आर्थिक मदद
अपने पूर्व संकल्प को दोहराते हुए डॉ. कौशलेंद्र नारायण ने निर्भया की माताजी को अपने निजी कोष से 50,000 रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने पीड़ित परिवार (माता-पिता, बहन और भाइयों) को आश्वासन दिया कि वे इस परिवार के सदस्य के रूप में न्याय की लड़ाई में हमेशा साथ खड़े रहेंगे।

डॉ. कौशलेंद्र नारायण की मांगें:

  • त्वरित गिरफ्तारी: सभी दोषियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
  • स्पीडी ट्रायल: मामले का स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को ‘मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास’ की सजा दी जाए।
  • जाति-धर्म से ऊपर उठें: समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर पीड़िता के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, क्योंकि “बलात्कारियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता।”
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