पटना: बिहार की राजधानी के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुए कथित बलात्कार और हत्या मामले में सीबीआई जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचती हुई नहीं दिख रही है। CBI की कार्यप्रणाली और वर्तमान सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, इसी के विरोध में कल रविवार को पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर एक दिवसीय विशाल धरने का आयोजन किया जा रहा है।
फेसबुक पर सक्रिय सामाजिक विचारक पुष्कर नारायण सिंह ने अपने फेसबुक स्टेटस पर इस मामले की वर्तमान स्थिति पर तीखा प्रहार किया है। उनका कहना है कि बिहार में रसूखदारों के दबाव के आगे देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियां भी घुटने टेकती नजर आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच जहां से शुरू हुई थी, महीनों बाद भी वहीं खड़ी है।
पुष्कर नारायण सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह बिहार है, यहाँ रसूखदारों को बचाने के लिए जांच की दिशा ही बदल दी जाती है। विडंबना देखिए कि पीड़ित परिवार की सुनने के बजाय, एजेंसियां उल्टा उन्हें ही दोषी साबित करने की कोशिश कर रही हैं।”
उन्होंने इस मामले में सबसे गंभीर आरोप उन नेताओं की शर्मनाक चुप्पी पर लगाया है जो अक्सर जातीय हितों की बात करके और अपने आप को समाज का हितैषी दिखाते हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक ‘भूमिहार’ समाज की बेटी के साथ हुए इस जघन्य अपराध पर तथाकथित ‘जाति के रहनुमाओं’ ने चुप्पी साध ली है। समाज के लोगों का मानना है कि सत्ता के संरक्षण में दोषियों को बचाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है।
कल के आंदोलन की मुख्य रूपरेखा:
पीड़िता के परिजनों के न्याय की मांग को लेकर आयोजित इस धरने के माध्यम से सरकार और प्रशासन तक यह संदेश पहुँचाने की कोशिश की जाएगी कि आम जनता अब और चुप नहीं बैठने वाली।
दिनांक: 29 मार्च 2026 (रविवार)
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक
स्थान: गर्दनीबाग धरना स्थल, पटना
उद्देश्य: नीट (NEET) छात्रा के हत्यारों को फांसी और मामले की निष्पक्ष न्यायिक निगरानी।
धरने का नारा ‘बहन-बेटी के सम्मान में, पूरा बिहार मैदान में’ का नारा बुलंद किया गया है। अब देखना यह होगा कि कल होने वाला यह धरना प्रशासन की नींद उड़ाने में कितना सफल होता है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाएगा, जिसकी उम्मीद वे महीनों से कर रहे हैं।
