Sunday, March 1, 2026
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पटना नीट छात्रा मामला: “मनीष रंजन निर्दोष कैसे?” क्या CBI पर भी हैं कोई “ऊपरी दबाव”?

CBI का कोर्ट में बड़ा बयान: क्या पुलिस की ‘फाइलें’ दबाने से बच जाएगा मुख्य आरोपी?

पटना: राजधानी के मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मृत्यु और बलात्कार के मामले ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने न्याय प्रणाली और जांच एजेंसियों के बीच के तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई (CBI) के बयान ने सबको चौंका दिया, जिससे यह सवाल उठने लगा है— क्या मनीष रंजन को बचाने के लिए “ऊपर” से कोई दबाव है?

CBI का अदालती खुलासा: “पुलिस नहीं दे रही जानकारी”: शनिवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने माननीय न्यायालय के समक्ष बेहद गंभीर पक्ष रखा। सीबीआई के वकील ने कहा कि:दस्तावेजों का अभाव: स्थानीय पुलिस (SIT) और सीआईडी (CID) ने गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन से संबंधित महत्वपूर्ण केस डायरी और साक्ष्य सीबीआई को उपलब्ध नहीं कराए हैं।

असहयोग का आरोप: बिना पुलिसिया इनपुट और शुरुआती जांच की फाइलों के, सीबीआई यह तय नहीं कर पा रही है कि मनीष रंजन की भूमिका वास्तव में क्या थी।

न्यायालय का निर्देश: कोर्ट ने सीबीआई के इस तर्क को ‘गंभीर’ माना है और जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि वह पुलिस के इस “असहयोग” को लिखित रूप (Written Submission) में कोर्ट को सौंपे।

संदिग्धों से दूरी, परिवार पर ‘प्रहार’?: पीड़िता के परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि जांच के नाम पर केवल समय बिताया जा रहा है।

पूछताछ का अभाव: मनीष रंजन एक महीने से जेल में है, लेकिन ना उससे और ना ही इस मामले में अन्य रसूखदार संदिग्धों और घटना की रात हॉस्टल में मौजूद ‘वीआईपी’ चेहरों से कोई ठोस पूछताछ नहीं हुई।

परिजनों का उत्पीड़न: आरोप है कि पुलिस और प्रशासन असली गुनहगारों तक पहुँचने के बजाय पीड़ित परिवार को ही कानूनी पेचीदगियों में उलझाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।

शंभू हॉस्टल का ‘तिलिस्म‘: 4 मंजिला इमारत और सीक्रेट गेटजांच में यह साफ हो चुका है कि यह 4 मंजिला इमारत (Ground + 3) नियमों को ताक पर रखकर चल रही थी।

मनीष रंजन का फ्लोर: किराए पर दिए होने के बावजूद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन खुद इसी इमारत के चौथी मंजिल पर रहता था, जहाँ से पूरी इमारत और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

सीक्रेट एग्जिट: हॉस्टल के पीछे का वह ‘गुप्त रास्ता’ जिसका इस्तेमाल बिना सीसीटीवी की नजर में आए किया जाता था, आज भी सबसे बड़ा रहस्य है। क्या उसी रास्ते का उपयोग साक्ष्य मिटाने और संदिग्धों के आने-जाने के लिए हुआ?

बड़ा सवाल: क्या वाकई मनीष रंजन निर्दोष है?: शुरुआती जांच में पुलिस ने खुद दावा किया था कि:मनीष रंजन ने हॉस्टल के CCTV और मृतक पीड़िता के वाट्सअप मोबाइल डेटा के साथ छेड़छाड़ की है।

उसने अपनी लोकेशन (देहरादून बनाम जहानाबाद) को लेकर पुलिस से झूठ बोला। मतलब घटना के बाद पुलिस द्वारा पूछताछ में मनीष रंजन ने घटना के दौरान अपना लोकेशन देहरादून का बताया था जबकि पुलिस जांच में इसका मोबाइल लोकेशन जहानाबाद और पटना स्थित शंभू हॉस्टल के आसपास ही था

ऐसे में अब सीबीआई का यह कहना कि पुलिस जानकारी नहीं दे रही, दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। क्या यह रसूखदारों को बचाने की कोई संगठित कोशिश हैं। लेकिन इस मामले में माननीय न्यायालय का सख्त रुख सकारात्मक परिणाम का संकेत पीड़िता के परिजनों को दे रहा हैं।

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