Monday, April 6, 2026
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पटना नगर निगम की अनूठी पहल: ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ से सफाईकर्मियों के बच्चे बनेंगे IAS, IPS और डॉक्टर

पटना: शहर की गलियों और सड़कों को चकाचक रखने वाले सफाईकर्मियों के बच्चों के सपनों को अब ‘हकीकत के पंख’ लगने वाले हैं। पटना नगर निगम ने ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ की शुरुआत की है, जिसके तहत निगम के सफाईकर्मियों, सफाई निरीक्षकों और मुख्य सफाई निरीक्षकों के बच्चों को UPSC, BPSC, JEE और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बिल्कुल निशुल्क कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

​नगर निगम की यह पहल सामाजिक समानता और कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

किन्हें मिलेगा लाभ?

​इस योजना का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है। इसमें निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों के बच्चे पात्र होंगे:

स्थायी सफाईकर्मी

दैनिक वेतनभोगी (Daily Wagers)

आउटसोर्सिंग व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी

सफाई निरीक्षक (SI) एवं मुख्य सफाई निरीक्षक (CSI)
​चयन प्रक्रिया और तैयारी

​पटना नगर निगम के सभी अंचलों में सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारियों द्वारा पात्र अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जा रही है।

प्रारंभिक रुझान: सोमवार तक कुल 35 अभ्यर्थियों ने इस योजना में गहरी रुचि दिखाई है।

चयन का आधार: विद्यार्थियों का चयन उनके पिछले शैक्षणिक प्रदर्शन (Academic Performance) के आधार पर होगा।

स्क्रीनिंग टेस्ट: शॉर्टलिस्ट किए गए बच्चों के लिए एक प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद अंतिम चयन सूची बनेगी।

कोई सीमा नहीं: नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि लाभ पाने वाले बच्चों की संख्या पर कोई ऊपरी सीमा (Limit) नहीं रखी गई है।

​CSR के जरिए मिलेगी वित्तीय सहायता

​नगर निगम इन मेधावी बच्चों को शहर के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों से जोड़ने का काम करेगा। बच्चों की पढ़ाई, किताबों और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से पूर्ण वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाएगी। निगम स्वयं इन बच्चों की प्रगति की नियमित समीक्षा भी करेगा।

​”सफाईकर्मियों के परिवारों को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारी जिम्मेदारी है। ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ का उद्देश्य केवल कोचिंग देना नहीं, बल्कि सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देना है ताकि इन बच्चों को समाज में बराबरी का अवसर मिल सके।” — यशपाल मीणा, नगर आयुक्त, पटना

पटना नगर निगम का यह कदम उन “स्वच्छता वीरों” के प्रति एक सम्मान है जो दिन-रात शहर की सेवा में जुटे रहते हैं। अब उनके बच्चे भी प्रशासनिक और तकनीकी सेवाओं में जाकर समाज का नाम रोशन कर सकेंगे।

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