जिलाधिकारी, पटना त्यागराजन एम एस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करते हुए यह आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन पूरी तरह से सजग, सतर्क और तैयार है। गंगा के जल-स्तर में हो रही वृद्धि को लेकर उन्होंने दीघा पाटीपुल-मीनार घाट, कुर्जी बिंद टोली घाट सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण किया और आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी स्थिति की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने बताया कि गंगा के बढ़ते जल-स्तर के कारण कुछ निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है, लेकिन प्रशासन की स्थिति पर पैनी नजर है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पूरी तैयारी की जा चुकी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, प्रशासन उनके साथ है।
राहत कार्यों में तेजी: सामुदायिक रसोई से लेकर मेडिकल कैम्प तक व्यवस्था
कुर्जी-बिंद टोली इलाके में विशेष तैयारियों की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि वहां सूखा राशन वितरण, सामुदायिक रसोईघर की शुरुआत, मेडिकल कैम्प, अस्थायी शौचालय, पिंक टॉयलेट, वाटर टैंकर और वाटर एटीएम जैसी सभी व्यवस्थाएं आज शाम तक लागू कर दी जाएंगी। लोगों के सुगम आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था पहले से की गई है। साथ ही पशु चिकित्सा, चारा, पशु शेड और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।
35 नावों की व्यवस्था, जरूरत पर संख्या बढ़ेगी
जिलाधिकारी ने बताया कि फिलहाल पटना जिले में 35 नावों की व्यवस्था की गई है, जिसे आवश्यकता अनुसार और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नाव संचालन में सभी सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन हो।
जमीनी स्तर पर निगरानी तेज, सभी अधिकारी कर रहे लगातार भ्रमण
डीएम के निर्देश पर अंचलाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े वरीय अधिकारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने सभी को SOP के तहत त्रुटिहीन कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अपर जिला दंडाधिकारी (आपदा प्रबंधन) को पूरे राहत कार्य का अनुश्रवण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
गंगा के जल-स्तर पर प्रशासन की नजर
गांधी घाट, दीघा घाट और मनेर में गंगा के जल-स्तर को लेकर जिलाधिकारी ने ताजा जानकारी देते हुए बताया कि जल-स्तर अभी उच्चतम खतरे के निशान से नीचे है, हालांकि इसमें धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है।
गांधी घाट पर आज सुबह 6 बजे जल-स्तर 49.87 मीटर रहा, जबकि खतरे का निशान 50.52 मीटर है।
दीघा घाट पर 51.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो 52.52 मीटर के उच्चतम स्तर से नीचे है।
मनेर में जल-स्तर 52.99 मीटर रहा, जबकि खतरे का स्तर 53.79 मीटर है।
हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई हेतु नियंत्रण कक्ष सक्रिय
जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी तरह की सूचना या सहायता हेतु जिला आपातकालीन संचालन केंद्र का नियंत्रण कक्ष (फोन: 0612-2210118) लगातार सक्रिय है। आम जनता से अपील की गई है कि वे किसी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें।
