पटना: बिहार सरकार ने ऐतिहासिक बेतिया राज की अरबों की संपत्तियों को व्यवस्थित करने और उन्हें भू-माफियाओं से बचाने के लिए ‘बेतिया राज संपत्ति नियमावली, 2026’ का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की है कि राज्य के भीतर और बाहर स्थित बेतिया राज की सभी चल-अचल संपत्तियाँ अब सरकार के पूर्ण नियंत्रण में होंगी।
01 जनवरी 1986 की ‘कट-ऑफ’ तिथि तय
नई नियमावली के तहत अवैध कब्जेदारों पर नकेल कसने के लिए 01 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि माना गया है।
किसे मिलेगी राहत: जो लोग इस तिथि से पहले (यानी कम से कम 40 वर्षों से) वैध दस्तावेजों के साथ काबिज हैं, उन्हें निर्धारित शुल्क चुकाकर संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व (Freehold) प्राप्त करने का मौका मिलेगा।
किसे होगी कार्रवाई: 1986 के बाद अवैध रूप से कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उनके द्वारा बनाए गए भवनों को सरकार अपने अधीन (Commandeer) ले सकती है।
आपत्तियों के लिए 60 दिनों का समय
अधिसूचना जारी होने के बाद, किसी भी संपत्ति पर दावे या आपत्ति के लिए संबंधित पक्षों को 60 दिनों का समय दिया जाएगा। इन आपत्तियों के निपटारे के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नियुक्त होंगे, जिनके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ होंगी। उन्हें अधिकतम 90 दिनों में मामलों का फैसला करना होगा।
6 जिलों में फैली है 24 हजार एकड़ से अधिक भूमि
सर्वेक्षण के अनुसार, बेतिया राज की कुल 24,477.14 एकड़ भूमि बिहार के छह मुख्य जिलों में फैली हुई है:
पश्चिम चम्पारण: 16,671.91 एकड़
पूर्वी चम्पारण: 7,640.91 एकड़
सारण: 109.96 एकड़
गोपालगंज: 35.58 एकड़
पटना: 11.49 एकड़
सीवान: 7.29 एकड़
विरासत संपत्तियों का संरक्षण
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बेतिया राज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली इमारतों का संरक्षण विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की मदद से किया जाएगा। जिन संपत्तियों पर कोई वैध दावा नहीं होगा, उन्हें ‘बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956’ के तहत खाली कराया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इन बहुमूल्य जमीनों का उपयोग राज्य के विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं के लिए किया जा सके।
