पटना: राजधानी के बहुचर्चित नीट छात्रा संदिग्ध मौत मामले में आज पॉक्सो कोर्ट में न्याय और जांच की सुस्त रफ्तार के बीच एक बड़ी जद्दोजहद देखने को मिली।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर बुधवार को करीब ढाई घंटे तक तीखी बहस हुई। अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर अब गुरुवार (12 मार्च) को निर्णय सुनाया जाएगा।
जांच एजेंसियों पर कोर्ट का ‘हंटर’: “मुआवजा कौन देगा?”
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख जांच एजेंसियों—CBI और पटना पुलिस की SIT—के प्रति बेहद कड़ा रहा।
कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए पूछा कि जब एजेंसी पिछले 20 दिनों से मामले को देख रही है, तो वह अब तक ‘मूकदर्शक’ क्यों बनी हुई है?
अदालत ने एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए सवाल किया, “यदि जांच एजेंसी की लापरवाही के कारण कोई व्यक्ति लंबे समय तक गैरकानूनी तरीके से जेल में रहता है, तो उसका मुआवजा कौन देगा?”
बयानों का ‘मायाजाल’ और गायब सबूत
कोर्ट ने जांच में मौजूद भारी विसंगतियों को भी उजागर किया:
दवाइयों का रहस्य: छात्रा के कमरे से बरामद 6 दवाइयों की स्ट्रिप में से केवल 3 ही साक्ष्य (Evidence) के तौर पर क्यों दिखाई गईं? इस पर कोर्ट ने एसआईटी से स्पष्ट जवाब मांगा।
बयानों में अंतर: कोर्ट ने पाया कि पहले के जांच अधिकारी, एसआईटी और अब सीबीआई, तीनों के बयानों और जांच की दिशा में जमीन-आसमान का अंतर है।
मनीष रंजन का पक्ष: मनीष ने कोर्ट को बताया कि उसे घटना की जानकारी 7 जनवरी को हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल से मिली थी।
एजेंसियों की ‘ना’ नहीं, फिर भी जेल बरकरार
हैरानी की बात तब रही जब कोर्ट ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या मनीष रंजन को जमानत देने पर कोई आपत्ति है? इस पर CBI और SIT इंचार्ज डॉ. अन्नु कुमारी, दोनों ने ही स्पष्ट कहा कि फिलहाल जांच के लिए उन्हें मनीष रंजन की कस्टडी की जरूरत नहीं है और जमानत से जांच पर असर नहीं पड़ेगा।
इसके बावजूद, स्पेशल पीपी और पीड़ित परिवार के वकीलों ने मनीष को इस पूरे मामले का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए जमानत का पुरजोर विरोध किया।
न्यायालय की सक्रियता बनाम एजेंसियों की विफलता
इस पूरे मामले में अब तक पटना पुलिस की एसआईटी और सीबीआई की जांच से कुछ भी ठोस या सकारात्मक निकलकर सामने नहीं आया है।
यह माननीय न्यायालय का ही एकतरफा और दृढ़ प्रयास है कि मामले के हर पहलू की इतनी बारीकी से पड़ताल की जा रही है, जिसके कारण एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन को अब तक जमानत नहीं मिल सकी है।
