Saturday, February 14, 2026
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नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास गिरफ्तार, कुछ पत्रकार और नेता पुलिस की रडार पर

नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बदस्तूर जारी है। बयानों की फेहरिस्त की अवलोकन से स्पष्ट होता है कि कुछ लोग निहित स्वार्थ में बयानबाजी कर रहे हैं । उनका नीट छात्रा को न्याय दिलाने से कोई लेना देना नहीं है।

बयानबाजी के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने पिछले दिनों मीडिया में कई ऐसे बयान दिए जिससे सनसनी फैल गई। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर भी कई सनसनीखेज पोस्ट डाले।

पुलिस ने उनके पोस्ट और बयानों की मॉनिटरिंग की तो पाया कि एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत की भ्रामक पोस्ट हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन पोस्ट के जरिए पूर्व आईपीएस और उनके समर्थकों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। पटना पुलिस ने इसी आधार पर पूर्व आईपीएस अधिकारी आईपीएस अमिताभ दास को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के नजदीकी सूत्रों के अनुसार इस मामले में कुछ पत्रकार और नेता भी रडार पर हैं जो बिना आधिकारिक आधार के निरंतर सोशल मीडिया पर मनमानी खबर चला रहे हैं। जिससे पटना पुलिस की पूरे देश के साथ विदेश में भी बदनामी हो रही है।

अपने आप को वरिष्ठ और सुलझे हुए पत्रकार प्रचारित करने वाले कुछ लोग इस मामले में निरंतर मीडिया ट्रायल चला रहे हैं। और बिना कोई ठोस आधार के मृतक नीट छात्रा के परिवार वालों को संदेहास्पद और उन्हें आरोपी घोषित करने पर तुले है।

जबकि मामला अब सीबीआई के पास चला गया है और सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।

पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार तो जैसे इस मामले में मृतका के परिवार वालों को फसाने के लिए जैसे सुपारी ही ले ली है। वे लगातार अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बिना कोई आधिकारिक आधार के यह लिख रहे हैं की अस्पताल ने मृतका के परिजन को कितने अंडरगारमेंट दिए और परीजनों ने पुलिस को कितने अंडरगारमेंट्स सौंपे?????

अगर इसमें सच्चाई भी होगी तो यह बात पुलिस के तरफ से कभी भी आधिकारिक रूप से दावा नहीं किया गया है। फिर उक्त पत्रकार निरंतर अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर ऐसे भ्रामक और किसी की निजता के अधिकार का हनन करने वाले पोस्ट क्यों कर रहे हैं?

ऐसे ही अनर्गल बयान बाजी के कारण पिछले दिनों पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी की बात दबी जुबान से लोग कर रहे हैं।

अब बारी है उन स्वघोषित वरिष्ठ पत्रकारो की, जो खोजी पत्रकारिता की आड़ में यह भूल गए हैं की बलात्कार पीड़िता के परिजनों पर बिना आधिकारिक आधार के सोशल मीडिया में गंभीर और उन्हें शर्मसार करने वाले आरोप लगाना गंभीर अपराध है।

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