अरुण कुमार पांडेय
पटना,04 मार्च। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे ।इसके साथ बिहार में सत्ता परिवर्तन अवश्यंभावी है। नीतीश कुमार सीएम का पद त्याग करेंगे। बिहार में भाजपा का सीएम होगा। फिलहाल संभावना है कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी “लव कुश” समीकरण की बदौलत नया सीएम होंगे। नीतीश कुमार से उनकी अच्छी बनती भी है।
बिहार में इस प्रकार बीजेपी का कोई पहला सीएम होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पूर्विह्न 11.30 बजे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन के समय उपस्थित रहने के लिए कल पटना आ रहे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा में फिर से मेंबर बनने के लिए नामांकन करेंगे इस चुनाव में राज्यसभा की पांचों सीट सत्तारूढ एनडीए के खाते में जाना तय है । इसमें दो-दो बीजेपी को दो बीजेपी और जदयू के एक रालोमो का सदस्य होगा। इस चुनाव में बीजेपी को दो सीट का फायदा और राजद को दो सीट का नुकसान हुआ है।
बिहार में 18वीं विधानसभा के चुनाव के ही समय यह लग रहा था की सीएम नीतीश कुमार की उम्र और सेहत के कारण देर सवेर सत्ता परिवर्तन होगा। भाजपा विधानसभा के चुनाव में 89 और जदयू को 85 सीटें मिली है।
16 मार्च को राज्यसभा के की 5 सीटों के लिए मतदान होना है। यदि कोई 5 से अधिक उम्मीदवार नहीं होगा तो सभी निर्विरोध चुन लिया जाएंगे। जिन पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है उन सदस्यों का कार्यकाल 6 अप्रैल को समाप्त होना है। इस प्रकार नीतीश कुमार 6 अप्रैल के बाद ही राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य होने के बाद सदस्यता ग्रहण करेंगे। उसके 14 दिनों के अंदर सीएम का पद त्याग करना होगि।
उम्मीद है कि गृह मंत्री अमित शाह के कल पटना प्रवास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी अलग बात होगी जिसमें नई सरकार के गठन की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी ।
संभावना है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जदयू में एंट्री के बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू होने के साथ अप्रैल में होने वाले विधान परिषद के चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाकर परिषद का सदस्य बनाया जाएगा और नई सरकार में उसके पहले भी उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा सकता है
नई सरकार बनने पर अब यह सवाल उठेगा की डिप्टी सीएम दो होंगे कि एक होंगे। सामान्य वर्ग के किसी जाति को एक डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है।
नई सरकार बनने पर यह तय है कि अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी समाप्त कर शराब का कारोबार फिर चालू हो सकता है ।शराबबंदी समाप्त की जा सकती है। भाजपा अपने एजेंडे के हिसाब से कुछ नए कार्यक्रम की भी शुरुआत कर सकती है ।
