Sunday, April 12, 2026
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सावधान! मासूमों पर बुरी नजर रखने वाले दरिंदों पर पटना पुलिस का ‘डिजिटल प्रहार’

पटना: बिहार में कम उम्र के बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों को लेकर पटना पुलिस अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में साइबर सेल ने एक ऐसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने समाज के रक्षक और भक्षक के बीच के अंतर को धुंधला कर दिया है। पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो सरकारी तंत्र (जीविका) का हिस्सा होते हुए भी पर्दे के पीछे मासूमों के बचपन को कलंकित कर रहा था।

खबर का मुख्य विश्लेषण: डिजिटल अंधेरे में मासूमियत का सौदा

​हाल ही में पटना के पालीगंज (अख्तियारपुर) से गिरफ्तार नीतीश कुमार कौशल की कहानी पुलिस के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आरोपी जीविका कर्मी के रूप में समाज के बीच काम करता था, लेकिन उसके मोबाइल फोन से बरामद 1000 से अधिक अश्लील वीडियो ने उसके खौफनाक चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

दो साल का काला इतिहास: आरोपी केवल कंटेंट देख ही नहीं रहा था, बल्कि पिछले 2 सालों से टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो डाउनलोड और सर्कुलेट कर रहा था।

कमर्शियल नेटवर्क की आशंका: पटना पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय गिरोह काम कर रहा है। आरोपी के बैंक खातों की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इन मासूमों की तस्वीरों और वीडियो से कोई आर्थिक लाभ तो नहीं कमाया जा रहा था।

कानून का शिकंजा: POCSO और IT एक्ट की धाराओं में कार्रवाई

​पटना साइबर थाना के SHO नीतीश चंद्र धारिया के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि इंटरनेट की गुमनामी में छिपे अपराधियों के दिन अब लद चुके हैं। पुलिस ने आरोपी पर पोक्सो एक्ट (POCSO) और आईटी एक्ट की सख्त धाराएं लगाई हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी स्वयं दो बच्चों का पिता है, जो समाज में गिरते नैतिक मूल्यों का प्रमाण है।

पुलिस की सख्त चेतावनी: देखना और साझा करना भी है जुर्म

​पटना पुलिस ने इस कार्रवाई के माध्यम से आम नागरिकों के लिए एक कड़ा संदेश जारी किया है:

कंटेंट रखना अपराध है: यदि आपके पास बच्चों से जुड़ा कोई भी आपत्तिजनक वीडियो आता है, तो उसे रखना या आगे भेजना आपको सलाखों के पीछे भेज सकता है।

तुरंत करें रिपोर्ट: यदि आपको किसी टेलीग्राम ग्रुप या सोशल मीडिया हैंडल पर ऐसी गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

सतर्क रहें अभिभावक: बच्चों के हाथ में मोबाइल देते समय ‘पैरेंटल कंट्रोल’ का उपयोग करें और उनकी डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखें।

“समाज के हर नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने में पुलिस का सहयोग करे। आपकी एक छोटी सी सूचना किसी मासूम का जीवन बचा सकती है।”पटना पुलिस

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