राघोपुर नाव हादसा – कुल 14 मौत, मरने वालों में ज्यादातर लड़कियां
बिष्णु नारायण चौबे
वैशाली / राघोपुर: वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद पंचायत में मंगलवार रात हुआ दर्दनाक नाव हादसा पूरे बिहार को झकझोर गया है। गंगा नदी के ढाब क्षेत्र में हुई इस घटना ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा –
हादसे की असली वजह प्रशासन भले ही स्थानीय लोगों की लापरवाही करार देने की कोशिश कर रहा है लेकिन उन लोगों की यह मजबूरी भी मानी जा सकती है कि वे लोग एक छोटी नाव पर 25 से ज्यादा लोग बैठे थे।
अनेक ग्रामीणों के अनुसार यह घटना गंगा नदी के मुख्य धारा की नहीं है। गंगा नदी में बाढ़ आने के बाद राघोपुर दियारा के लगभग सभी गांव एक टापू जैसा बन जाता है और लोगों को अपनी दैनिक दिनचर्या के साथ एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए ढाव पार करना पड़ता है।
ढाव में बाढ़ के दौरान पानी भरा रहता है और इसके लिए नाव ही एकमात्र सहारा रह जाता है। इन ढाबों में गहरा पानी होने के साथ धारा भी तेज रहती है। और स्थानीय प्रशासन के द्वारा नागरिकों के लिए नाव की सुविधा उपलब्ध की जाती है।

स्थानीय नागरिक अखिलेश यादव के अनुसार रामपुर श्यामचंद पंचायत के लिए भी प्रशासन के तरफ से नाव उपलब्ध की गई थी लेकिन वह नाव छोटी थी और नाव की हालत भी ठीक नहीं थी। और ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक जाने की मजबूरी उन्हें मौत के मुंह में लेकर चली गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला स्थित माता महारानी स्थान के पास सिंघेश्वर राय के यहां श्राद्ध भोज था। उसी भोज में शामिल होने के लिए 25 से ज्यादा लोग, जिनमें अधिकांश बच्चे और किशोर थे, एक छोटी नाव में सवार थे। मंगलवार 13 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे बीच ढाव में नाव अनियंत्रित होकर पलट गई।
प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार नाव पलटने पर नाव में सवार जिसमें ज्यादातर बच्चे थे उनमें चीख पुकार मच गई। पानी गहरा होने के कारण किनारे पर खड़े कुछ लोग भी तत्काल रूप से बचाव कार्य नहीं कर पाए। कुछ लोगों ने सुखी लकड़ियाँ फेंक कर कुछ लोगों की जान बचाने की कोशिश की। स्थानीय नागरिक के अनुसार एनडीआरएफ की टीम घटना के लगभग 1 घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची।
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हादसे में जान गंवाने वालों में लड़कियां ज्यादा हैं, इसकी पुष्टि अब प्रशासन ने भी की है।
पुलिस के मुताबिक इस हादसे में अब तक जिन लोगों की मौत की पहचान हुई है, उनमें शामिल हैं:
पिंकी कुमारी, अंकिता कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, अलीशा कुमारी, सिकी कुमारी, भोणू कुमारी और मीरा कुमारी।
कुल 13 से 14 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है, 8 नामों की पुष्टि पुलिस ने की है।
परिजनों ने पोस्टमॉर्टम से इनकार कर दिया है। सभी बच्चों के शव गांव पहुंच गए हैं, जिसके बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
घायल और रेस्क्यू ऑपरेशन
वैशाली की डीएम वर्षा सिंह ने बताया है कि 7 घायलों को पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) में इलाज के लिए भेजा गया है। अभी कितने बच्चे लापता हैं, इसकी सही जानकारी सामने नहीं आई है।
SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार रात भर चला, जो बुधवार सुबह भी जारी है। रात के अंधेरे और गहरे पानी के कारण अभियान में मुश्किल आ रही थी।
मुआवजे का ऐलान
इस हृदयविदारक घटना पर सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया है:
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये देने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है।
फिलहाल राघोपुर दियारा क्षेत्र में शोक की लहर है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
