बच्चों को नशे से बचाने के साथ उनका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना भी जरूरी: मुख्य न्यायाधीश
पटना, 26 सितंबर 2026: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि बच्चों में नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य या अपराध का विषय नहीं है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। नशे की चपेट में आए बच्चों को सिर्फ सजा नहीं, बल्कि इलाज, देखभाल, शिक्षा और सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश आज बिहार लोक भवन में पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह श्रृंखला के अंतर्गत ‘ड्रग्स से परे बचपन: संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने पाटलिपुत्र की ज्ञान और शिक्षा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में बच्चों की सुरक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। नशे के कारण बच्चे पढ़ाई से दूर होते हैं, परिवार से रिश्ते बिगड़ते हैं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ-साथ शोषण और गलत गतिविधियों में इस्तेमाल होने के जोखिम में पड़ सकते हैं।
हर बच्चे के नशे की ओर जाने की वजह अलग
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि हर बच्चे के नशे की ओर जाने की वजह अलग हो सकती है, जैसे – दोस्तों का दबाव, उपेक्षा, हिंसा, गरीबी या घर का प्रतिकूल माहौल। इसलिए बच्चे को दोषी ठहराने के बजाय उसकी परिस्थितियों को समझकर सहायता देना जरूरी है।
उन्होंने ‘बचपन वापस लाने’ पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को नशे से मुक्त कराना पहला कदम है, उन्हें फिर स्कूल, परिवार और सामान्य जीवन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए इलाज के साथ काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य की मदद और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। बच्चों को नशे के कारोबार में फँसाने और उनका शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चे को परिवार में वापस भेजने से पहले घर का सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने न्यायपालिका, सरकार, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल संरक्षण संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयास पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “किसी बच्चे की पिछली परेशानी उसके भविष्य की पहचान नहीं बननी चाहिए; उसे कलंक के साथ नहीं जीना पड़े, बल्कि उसे सम्मान, सहयोग और नई शुरुआत का अवसर मिलना चाहिए। बच्चे केवल देश का भविष्य नहीं, आज के भी नागरिक हैं।”
राज्यपाल ने कहा – नशे में फँसा हर बच्चा अपराधी नहीं
इससे पहले अपने विशेष संबोधन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बच्चों में नशे की समस्या को केवल अपराध या स्वास्थ्य का विषय मानना उचित नहीं है। बच्चे की शिक्षा, परिवार, सुरक्षा और भविष्य को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने नशे के कारोबार के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू का उल्लेख करते हुए तस्करी और नेटवर्क पर कड़ी निगरानी की जरूरत बताई।
राज्यपाल ने कहा कि नशे में फँसा हर बच्चा हमेशा अपराधी नहीं होता, बल्कि कई बार वह स्वयं पीड़ित होता है। इसलिए बच्चों के पुनर्वास के साथ उनके शोषण में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी० कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति सुधीर सिंह सहित अन्य न्यायाधीश, लेडी गवर्नर सबीहा हसनैन, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, महाधिवक्ता एस०डी० संजय, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, प्रशासनिक, पुलिस एवं न्यायिक अधिकारीगण, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० फैजान मुस्तफा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
