Tuesday, September 22, 2026
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सरस मेला के प्रति लोग का बढ़ा आकर्षण, क्रेता और विक्रेताओं के बीच सेतु बना संवाद कार्यक्रम

सरस मेला के प्रति लोग का बढ़ा आकर्षण, क्रेता और विक्रेताओं के बीच सेतु बना संवाद कार्यक्रम

पटना – ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला के प्रति लोगों का आकर्षण देखते ही बन रहा है। हर उम्र और हर वर्ग के लोग परिवार सहित मेले में आ रहे हैं और मेले में बिक रहे हस्तशिल्प उत्पादों की जमकर खरीददारी और देशी व्यंजनों का लुत्फ़ उठा रहे हैं।

बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति ,जीविका द्वारा 29 सितंबर 2026 तक ज्ञान भवन, पटना में आयोजित किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह प्रथम संस्करण है।

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मेले के दूसरे दिन सोमवार को 24 हजार से अधिक लोगों ने मेला परिसर का भ्रमण किया। उत्पादों एवं व्यंजनों की बिक्री का आंकड़ा भी उत्साहजनक रहा। दूसरे दिन 21 सितंबर को सरस मेला में 22 लाख 90 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है।

पहले दिन 20 लाख 28 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद- बिक्री के बाद दूसरे दिन का यह आंकड़ा यह साबित करता है कि बिहार सरस मेला के प्रति लोगों का भरोसा और प्यार लगातार बढ़ रहा है। आयोजन के तीसरे दिन मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की है और देशी व्यंजनों को चखा l

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खरीददारी के साथ हुनर और ज्ञान का आदान-प्रदानबिहार सरस मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि यह ग्रामीण हुनर, संस्कृति और ज्ञान के आदान-प्रदान का राष्ट्रीय मंच बन गया है। यहां 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमी अपने-अपने प्रदेश की कला और उत्पादों को लेकर आई हैं।

मधुबनी पेंटिंग, सुजनी, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क, मखाना, गोविंद भोग चावल, कतरनी चुडा-चावल , गुड , रवा, मडुआ , बाजरा और चावल का आटा, मिलेट्स, अचार-पापड़ और हर्बल उत्पाद लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। फूड कोर्ट में बिहार के लिट्टी-चोखा, सेव-बुनिया, चाट, गोलगप्पे , अचार, पापड़ के साथ ही अन्य राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। इसके साथ ही कृत्रिम फूल, कृत्रिम ज्वेलरी , कालीन , रग्स , सजावट के सामान, खादी और उनी परिधान, आयुर्वेदिक पौधे , फूल एवं फलों के पौधे भी आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं l

सरस मेले की एक खास पहल है प्रतिदिन आयोजित होने वाला क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम। यह कार्यक्रम जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सीधे तौर पर क्रेताओं और विक्रेताओं को आपस में जोड़ रहा है, जो उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बिक्री में सहायक साबित होगा। इसका उद्देश्य उत्पादकों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है।

इसी कड़ी में मंगलवार को ज्ञान भवन परिसर में आयोजित क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम में कई बड़े क्रेताओं और वितरकों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से ब्रीहति, नेचुरल बी फार्म, हनी हॉस्पिटैलिटी तथा सभी प्रकार के घरेलू उपयोग के वस्तुओं के बड़े वितरक शामिल थे। उन्होंने उत्पादों को देखा, उनकी गुणवत्ता परखी और उद्यमियों से सीधा संवाद स्थापित किया।

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कई क्रेताओं ने जीविका दीदियों द्वारा उत्पादित उत्पादों एवं व्यंजनों में खास रुचि दिखाई है। इस संवाद कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ श्रीमती माधवी चौधरी, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका और श्री आलोक कुमार गोपाल, परियोजना प्रबंधक, जीविका ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर करने, आकर्षक ब्रांडिंग, मानकीकरण और आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों को तैयार करने के गुर सिखाए।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पैकेजिंग अच्छी हो, गुणवत्ता एक समान हो और ब्रांड की कहानी जुड़ी हो तो ग्रामीण उत्पाद बड़े-बड़े मॉल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी अपनी जगह बना सकते हैं।

मेले में भाग ले रही जीविका दीदियों में सरस मेला के आयोजन को लेकर काफी उत्साह है। उन्होंने बताया कि सरस मेला ने उन्हें अपनी पहचान दी है। पहले उनके उत्पाद गांव तक ही सीमित थे, लेकिन अब उन्हें शहरों एवं बाज़ारों में हजारों ग्राहकों से जुड़ने का मौका मिल रहा है और बड़े क्रेताओं से सीधा संपर्क हो रहा है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है । मेला में सुसज्जित सभी स्टॉल पर डिजिटल खरीददारी की व्यवस्था है और रुपये की जमा निकासी के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित हैं l

उल्लेखनीय है कि बिहार सरस मेला 29 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। ग्रामीण महिला उद्यमियों के हुनर को प्रोत्साहित देते हुए बिहार सरस मेला उनकी आत्मनिर्भरता की गाथा भी प्रस्तुत कर रहा है l

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