Sunday, September 20, 2026
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बिहार से 8 केंद्रीय मंत्री 42 सांसद है, 250 से अधिक MLA/MLC है लेकिन सब नकारे और निकम्मे – तेजस्वी यादव

बिहार से 8 केंद्रीय मंत्री 42 सांसद है, 250 से अधिक MLA/MLC है लेकिन सब नकारे और निकम्मे – तेजस्वी यादव

पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज आयोजित पत्रकार परिषद में एनडीए सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार पिछले 28 दिनों से दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ राज्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ भीषण सूखा।

तेजस्वी यादव ने कहा कि इस बार राज्य में 35 फीसदी से भी कम बारिश हुई है, जिसके कारण लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों का लागत मूल्य तक नहीं निकल रहा है, लेकिन सरकार ने अभी तक सूखे का कोई आकलन तक नहीं किया है। किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

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वहीं बाढ़ को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य के 50 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकार की संवेदनहीनता का आलम यह है कि खानापूर्ति के लिए जो गिनी-चुनी सामुदायिक रसोई और राहत शिविर शुरू किए गए थे, वो भी फंड की कमी का हवाला देकर 2-4 दिन में ही बंद कर दिए गए।
तेजस्वी ने के अनुसार “जिन गरीबों के मकान गिर गए, जिनके घरों में पानी भरा है, जिनके जूते-चप्पल, कपड़े, बर्तन तक बह गए, जिनके घरों के आसपास आज भी बदबूदार पानी जमा है, इस बेशर्म सरकार ने उनके लिए राहत शिविर बंद कर दिए। अब वो पीड़ित कहां जाएंगे? सरकार के खजाने पर पीड़ितों का पहला हक है, लेकिन सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। न राहत मिली, न तिरपाल, न खाने-पीने का सामान,”

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2015 में जब महागठबंधन की सरकार थी और आपदा प्रबंधन व वित्त विभाग राजद के पास था, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सलाह पर बजट में प्रावधान कराया गया था कि बाढ़-सुखाड़ और प्राकृतिक आपदा के समय राज्य के कुल बजट का 4 फीसदी आकस्मिक निधि के रूप में खर्च किया जा सकता है। सरकार को बताना चाहिए कि उस हिसाब से आकस्मिक निधि कितनी बनती है और वो राशि कहां गई।

उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, लेकिन किसानों को आज तक एक रुपये का मुआवजा नहीं मिला।

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तेजस्वी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके पत्र लिखने और लगातार आवाज उठाने के बाद दिखावे के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार भेजा गया, लेकिन उन्होंने क्या रिपोर्ट सबमिट की, नुकसान का कितना आकलन किया, इसकी कोई जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।

“प्रधानमंत्री राहत कोष को कोरोना में खत्म कर पीएम केयर्स फंड बनाया गया, उस फंड से बिहार की मदद क्यों नहीं की गई? गोवा, अरुणाचल समेत कई राज्यों की कुल जनसंख्या जोड़ लें, उससे ज्यादा आबादी बिहार में बाढ़ से प्रभावित है, लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को बिहार की कोई फिक्र नहीं। क्या यह बिहार के साथ भेदभाव नहीं है?” उन्होंने सवाल उठाया।

बीजेपी नेताओं द्वारा अपनी एक-दो महीने की सैलरी देने के ऐलान पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि बाढ़ के बाद 100 करोड़ के दीये जलाकर पीड़ितों का जिया जलाने वाले लोग अब 1-2 लाख सैलरी देकर नौटंकी कर रहे हैं। सबकी सैलरी जोड़ लें तो 2-3 करोड़ भी नहीं होगी, क्या 50 लाख लोगों के लिए यह पर्याप्त है?

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“हिम्मत है तो सरकार से मदद करवाओ। यही डबल इंजन सरकार है क्या? बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद बिहार से हैं, लेकिन उनकी इतनी भी हैसियत नहीं कि प्रधानमंत्री से आग्रह कर सकें कि हुजूर, एक बार मेरे राज्य का दौरा कर लीजिए। बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है, बिहार से 8 केंद्रीय मंत्री हैं, एनडीए के 42 सांसद हैं, 250 से अधिक MLA/MLC हैं, लेकिन सब नकारे और निकम्मे हैं। जनता ऐसे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करेगी,” तेजस्वी ने कहा।

अंत में उन्होंने मांग की कि डबल इंजन सरकार अविलंब बाढ़ पीड़ितों को 15 हजार रुपये की तत्काल सहायता दे और सूखा व बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर यथाशीघ्र मुआवजा दे।

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