पटना: बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगामी 21, 22 और 23 अप्रैल 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन और महा-पड़ाव का आयोजन किया गया है। यूनियन के महासचिव कुमार विंदेश्वर सिंह ने बिहार की हजारों सेविकाओं और सहायिकाओं से इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
मुख्य मांगें: सरकारी दर्जा और सम्मानजनक मानदेय
यूनियन की प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है। संगठन ने मांग की है कि जब तक यह दर्जा नहीं मिलता, तब तक:
सेविकाओं को ₹26,000 मानदेय दिया जाए।
सहायिकाओं को ₹18,000 मानदेय सुनिश्चित किया जाए।
सुस्त संगठन इकाइयों को कड़ी चेतावनी
महासचिव कुमार विंदेश्वर सिंह ने कुछ जिला और परियोजना कमिटियों की निष्क्रियता पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कई कमिटियों की ओर से अब तक दिल्ली चलने की कोई ठोस सूचना प्राप्त नहीं हुई है, जो संगठन के अनुशासन के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि:
”संगठन के कुछ मापदंड होते हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है। जो नेतृत्वकर्ता जिम्मेदारी नहीं निभा सकते, उनका पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। आगामी मई माह में होने वाले राज्य सम्मेलन में संगठन ऐसी इकाइयों पर कड़ा संज्ञान लेगा।”
कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए महासचिव ने कहा कि आज तक आंगनबाड़ी कर्मियों ने जो भी हासिल किया है, वह सिर्फ संघर्ष के बल पर मिला है। उन्होंने कहा कि “दलाली और चापलूसी से कुछ प्राप्त नहीं होता।” उन्होंने सभी बहनों और अभिभावकों से अपील की कि वे 21 अप्रैल को दिल्ली के लिए प्रस्थान करें ताकि 23 अप्रैल को संसद के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की जा सके।
