बिहार को अग्रणी बनाने का संकल्प
पूसा (समस्तीपुर): भारतीय कृषि अनुसंधान की ऐतिहासिक धरती पूसा में ‘ईख अनुसंधान संस्थान’ ने अपनी गौरवशाली यात्रा के 94 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आयोजित भव्य स्थापना दिवस समारोह में संस्थान की उपलब्धियों, गन्ने की उन्नत किस्मों के विकास और किसानों की आय दोगुनी करने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल श्री तेजेन्द्र खन्ना, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय, बिहार सरकार के ईखायुक्त डॉ. अनिल कुमार झा और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जे. आर. पी. सिंह ने शिरकत की।
इतिहास के झरोखे से: 1905 से अब तक का सफर
वक्ताओं ने संस्थान की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए बताया कि कैसे 1905 में स्थापित कृषि अनुसंधान संस्थान ने देश को आधुनिक खेती का रास्ता दिखाया।
स्थापना: 1932 में मुशहरी फार्म (मुजफ्फरपुर) से शुरू हुई ईख अनुसंधान की यह यात्रा 1934 के विनाशकारी भूकंप के बाद 1936 में पूसा स्थानांतरित हुई।
योगदान: पिछले नौ दशकों में इस संस्थान ने गन्ने की ऐसी कई प्रजातियां विकसित की हैं, जिन्होंने न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्यों के चीनी उद्योगों की तस्वीर बदल दी।
लैब से लैंड तक: शोध को खेत तक पहुँचाने का संकल्प
कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि संस्थान का मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशाला से निकालकर किसानों के खेतों तक पहुँचाना है। उन्होंने गन्ना आधारित उद्यमिता (Entrepreneurship) और प्रसंस्करण (Processing) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसान सिर्फ कच्चा माल उत्पादक न रहकर ‘एग्रो-बिजनेस’ का हिस्सा बनें।
बिहार बनेगा गन्ना उत्पादन में नंबर-1
ईखायुक्त डॉ. अनिल कुमार झा ने बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग और संस्थान के बीच बेहतर समन्वय की बात कही। उन्होंने कहा कि उन्नत प्रभेदों (Varieties) और तकनीकी नवाचारों के दम पर बिहार को गन्ना उत्पादन और चीनी मिलों की कार्यक्षमता में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम जारी है।
मुख्य आकर्षण और उपलब्धियां:
नवाचार: कम पानी और रोग-प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों पर विशेष ध्यान।
किसान सशक्तिकरण: किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और बीज वितरण के माध्यम से सशक्त बनाना।
भविष्य की राह: गन्ने के सह-उत्पादों (जैसे इथेनॉल और गुड़ उद्योग) के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना।
समारोह के अंत में वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने गन्ना विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है।
