Monday, February 23, 2026
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पटना में वाहन चोरों की ‘मौज’: पुलिस की मेहनत बेकार, 15 दिनों में कोर्ट से मिल रही ‘आजादी’

‘!पटना | 19 दिसंबर 2025 बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर इन दिनों वाहन चोरों का ‘राज’ चल रहा है। आलम यह है कि पुलिस की धरपकड़ पर सिस्टम की सुस्ती भारी पड़ रही है। एक तरफ पुलिस अपनी पीठ थपथपाती है कि उन्होंने चोर को पकड़ लिया, वहीं दूसरी ओर कानून की गलियों से चोर मात्र 15 दिनों के भीतर मुस्कुराते हुए बाहर आ रहे हैं।

चोर बाहर, मालिक थानों के चक्कर में!

चित्रगुप्त नगर थाने के एक पुलिस अधिकारी ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया, “हम जान जोखिम में डालकर चोर को पकड़ते हैं, चोरी की गाड़ी बरामद करते हैं। लेकिन विडंबना देखिए—वाहन मालिक अपनी ही गाड़ी छुड़ाने के लिए महीनों तक कोर्ट और थाने की चप्पलें घिसता रहता है, जबकि अपराधी महज कुछ हजार रुपयों की जमानत (Bail) पर 10-15 दिनों में रिहा हो जाता है।

यह स्थिति पुलिस के मनोबल को तोड़ रही है। जब सजा का डर ही खत्म हो जाए, तो खाकी की सख्ती भी बेअसर साबित होने लगती है।

अपराध का ‘हथियार’ बनती आपकी गाड़ियां

पटना से चोरी हुए वाहन केवल आर्थिक नुकसान नहीं हैं, बल्कि ये संगीन जुर्म की बुनियाद बन रहे हैं। पटना के विभिन्न थानों के रिकॉर्ड बताते हैं कि चोरी की गई गाड़ियां दो-चार महीने बाद बिहार के सुदूर जिलों में बरामद होती हैं।

इन वाहनों का इस्तेमाल:

* कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और हत्या

* फिरौती और अपहरण

* चेन स्नेचिंग

* शराब माफियाओं द्वारा अवैध परिवहन

सावधान! यदि आपकी गाड़ी चोरी हुई है और आपने तुरंत FIR दर्ज नहीं कराई है, तो आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। अपराधी वारदात के बाद गाड़ी छोड़ देते हैं और पुलिस कागजों के आधार पर सीधे वाहन मालिक के दरवाजे पर दस्तक देती है।

आंकड़ों में पटना का ‘ऑटो-लिफ्टिंग’ आतंक

NCRB के हालिया डेटा (2024) पटना की डरावनी तस्वीर पेश करते हैं:

* कुल केस: 2,500 से अधिक वाहन चोरी।

* औसत: हर दिन लगभग 7 वाहन (बाइक/कार) गायब।

* हॉटस्पॉट: फुलवारी शरीफ, गर्दनीबाग और कंकड़बाग चोरों के सबसे पसंदीदा ठिकाने बने हुए हैं।

* स्ट्राइक रेट: पिछले 3 महीनों में 150 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन उनमें से अधिकांश अब फिर से सड़कों पर सक्रिय हैं।

चोर का कबूलनामा: “पकड़े गए तो क्या, जमानत पक्की है!

अनेक पकड़े जाने वाले वाहन चोरों के अनुसार उन्हें “पकड़े जाने का डर नहीं है। 10-15 हजार रुपये खर्च करो, कोर्ट से जमानत मिल जाती है। बाहर आकर फिर पुराने धंधे पर लग जाते हैं।

बड़ा सवाल: जनता कब तक सहेगी?

जब कानून के रखवाले बेबस हों और कानून की प्रक्रिया इतनी लचीली हो कि अपराधियों के लिए ढाल बन जाए, तो आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है। क्या पटना पुलिस और न्यायिक व्यवस्था मिलकर इस ‘कमजोर सिस्टम’ की मरम्मत करेंगे, या जनता इसी तरह डर के साये में अपनी गाड़ियां सड़कों पर छोड़ती रहेगी?

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