Sunday, April 12, 2026
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बिहार का विकास नहीं, गुजरात का एजेंडा चलाएगी नई सरकार: प्रशांत किशोर

मधेपुरा | 12 अप्रैल 2026
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आज मधेपुरा में एक प्रेस वार्ता के दौरान बिहार की भावी राजनीति और केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। किशोर ने विशेष रूप से महिला आरक्षण और बिहार के आगामी नेतृत्व को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

  1. महिला आरक्षण: ‘चुनावी राज्यों को लुभाने का हथियार’
    प्रशांत किशोर ने संसद में महिला आरक्षण बिल के विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की चर्चा कोई नई बात नहीं है, यह दशकों पुराना मुद्दा है। लेकिन, वर्तमान समय में इसे फिर से उछालना एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है।

“अभी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वहां की महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए सरकार अचानक इस पर चर्चा कर रही है। यह महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि चुनावी लाभ लेने की कोशिश है।”

  1. बिहार के अगले मुख्यमंत्री पर ‘गुजरात’ का साया
    बिहार में संभावित नेतृत्व परिवर्तन या नए मुख्यमंत्री की चर्चाओं पर पीके ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बिहार की सत्ता का रिमोट कंट्रोल अब पूरी तरह से दिल्ली और गुजरात के हाथों में चला गया है।

चयन का आधार: किशोर के अनुसार, अब बिहार का मुख्यमंत्री वह व्यक्ति नहीं बनेगा जिसे बिहार की जनता या स्थानीय विधायक चुनेंगे, बल्कि उसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह तय करेंगे।

प्राथमिकता का संकट: उन्होंने आरोप लगाया कि पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बिहार के विकास के प्रति जवाबदेह होने के बजाय गुजरात के हितों को प्राथमिकता देगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार के संसाधनों का उपयोग अब ‘गुजरात मॉडल’ को और मजबूत करने में किया जा सकता है।

  1. मजदूर बनाम मालिक’ का मुद्दा
    मधेपुरा की जनसभाओं में किशोर लगातार पलायन का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने अपनी ब्रीफिंग में भी दोहराया कि बिहार के 40 सांसद होने के बावजूद यहाँ के युवा गुजरात और अन्य राज्यों में जाकर मजदूर बन रहे हैं, जबकि कम सांसदों वाले राज्य (गुजरात) के नेता यहाँ की नीतियां तय कर रहे हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस बार वोट देते समय ‘नाली-गली’ नहीं, बल्कि अपने बच्चों के ‘पढ़ाई और रोजगार’ को प्राथमिकता दें।
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