पटना, 28 फरवरी 2026भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को बिहार संग्रहालय में “कला एवं संस्कृति के संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बिहार संग्रहालय और ब्रिटिश लिंगुआ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने संग्रहालयों को अतीत और भविष्य के बीच का सेतु बताया।
देशरत्न की विरासत को समर्पित होगी विशेष दीर्घा: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार संग्रहालय के उप-निदेशक श्री अशोक कुमार सिन्हा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अमर विरासत को नमन किया। उन्होंने घोषणा की कि:बिहार संग्रहालय में देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दुर्लभ चित्रों और उनकी कृतियों को समर्पित एक विशेष दीर्घा (Gallery) का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
यह पहल नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों और महान विभूतियों के योगदान से जोड़ने का काम करेगी। “संग्रहालय केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि ऐतिहासिक चेतना को सुदृढ़ करने के केंद्र हैं।” — अशोक कुमार सिन्हा
कला विहीन मनुष्य बिना पूँछ-सींग के पशु समान: डॉ. बीरबल झा:
मुख्य वक्ता और प्रख्यात लेखक डॉ. बीरबल झा (संस्थापक, ब्रिटिश लिंगुआ) ने अपने संबोधन में संग्रहालयों की कालजयी प्रासंगिकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि संग्रहालय सांस्कृतिक दूत के रूप में दुनिया को हमारी ज्ञान-परंपरा की गहराई से परिचित कराते हैं।
अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने के लिए उन्होंने महाराजा एवं कवि भर्तृहरी की अमर कृति ‘नीति शतकम्’ का उदाहरण देते हुए कहा:”साहित्यसंगीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः।” मतलब जिस मनुष्य में साहित्य, संगीत और कला का अभाव है, वह बिना पूँछ और सींग के साक्षात् पशु के समान है।
डॉ. झा ने रेखांकित किया कि सभ्यता सदियों में गढ़ी जाती है और संग्रहालय सुनिश्चित करते हैं कि संस्कृति की यह ज्योति कभी बुझने न पाए।
विरासत का संरक्षण:
एक राष्ट्रीय कर्तव्यसंगोष्ठी में कई अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए। उप-निदेशक डॉ. सुनील कुमार झा सहित अन्य वक्ताओं ने संग्रहालयों को शिक्षा के केंद्र और विरासत के भंडार के रूप में परिभाषित किया। संगोष्ठी का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि कला और संस्कृति का संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं का ही नहीं, बल्कि हर नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है।
इस अवसर पर श्री रणवीर सिंह राजपूत, डॉ. शंकर जय किशन, डॉ. विशी उपाध्याय, श्रीमती स्वाति कुमारी सिंह, श्री नंदन कुमार, श्री घनश्याम सिंह, श्री पशुपति कुमार सिंह, मिस अदीवा, श्री सुराज सावंत और श्री रंजीत कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
