Thursday, January 8, 2026
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महाघोटाले की तैयारी: जो सड़कें बन चुकीं, उनके लिए फिर निकाल दिए टेंडर; बिहार में 250 करोड़ का खेल उजागर

पटना: बिहार में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “स्मार्ट मॉडल” सामने आया है जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए। जिस सड़क पर लोग चल रहे हैं और जो नालियां बनकर तैयार हो चुकी हैं, उन्हीं कामों के लिए दोबारा टेंडर जारी कर दिए गए। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BUIDCO) की जांच में राज्य के सभी 38 जिलों में चल रही ‘मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना’ के तहत ऐसे 105 डुप्लीकेट प्रोजेक्ट्स पकड़े गए हैं।

कैसे होता था यह ‘कागजी’ खेल?

जांच में खुलासा हुआ कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर उन कार्यों का दोबारा चयन कर रहे थे जो पहले ही पूरे हो चुके हैं। मकसद साफ था—

बिना ईंट रखे करोड़ों रुपये की बंदरबांट करना।

* पकड़े गए प्रोजेक्ट्स: 105 से अधिक संदिग्ध प्रोजेक्ट्स मिले।

* रद्द की गई योजनाएं: 32 प्रोजेक्ट्स को तत्काल प्रभाव से रद्द किया गया है।

* बचाई गई राशि: इस खुलासे से करीब 250 करोड़ रुपये का घोटाला होने से बच गया।

राजधानी पटना में सबसे ज्यादा ‘सेंधमारी’

हैरानी की बात यह है कि यह खेल राजधानी पटना की नाक के नीचे सबसे अधिक सक्रिय था। पटना के अजीमाबाद, बांकीपुर, कंकड़बाग और नूतन राजधानी अंचल के करीब 15 प्रोजेक्ट्स को रद्द किया गया है। इसके अलावा औरंगाबाद, गया, मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय और सिवान जैसे जिलों में भी भ्रष्टाचार की यह जड़ें फैली हुई थीं।

एक उदाहरण: पटना के बीएम दास रोड का निर्माण इसी साल जून में पूरा हुआ था। लेकिन इसके महज 3 महीने बाद ही इसे फिर से नई योजना में शामिल कर टेंडर निकालने की तैयारी कर ली गई।

सरकारी ‘बाबू’ और ‘ठेकेदार’ सुरक्षित क्यों?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बिहार सरकार की चुप्पी पर खड़ा हो रहा है। BUIDCO ने जांच तो की और टेंडर भी रद्द किए, लेकिन अब तक उन दोषी सरकारी इंजीनियरों और बाबुओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं जिन्होंने इन फाइलों को पास किया था।

कड़वे सवाल:

* क्या बिना विभागीय इंजीनियरों की मिलीभगत के पुराने काम का दोबारा टेंडर संभव है?

* जिन ठेकेदारों ने दोबारा टेंडर भरा, क्या उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया?

सूत्रों का कहना है कि विभाग केवल टेंडर रद्द करके मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की चोरी का प्रयास था।

* सरकार ने अब तक किसी बड़े अधिकारी पर FIR या निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की?

जांच का नया सिस्टम: ‘क्रॉस चेकिंग’ से फंसा पेंच

BUIDCO के एमडी अनिमेश पराशर के निर्देश पर जब ‘क्रॉस चेकिंग’ सिस्टम लागू हुआ, तब यह फर्जीवाड़ा सामने आया। पहली बार टेंडर 15 से 18 फीसदी बिलो रेट (कम दर) पर आए हैं, जिससे विभाग को अहसास हुआ कि पहले ठेकेदार और अफसर मिलकर रेट बढ़ाकर सरकार को चूना लगा रहे थे।

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