रोहतास, बिहार | 10 मार्च 2026
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने आज बिहार की राजनीति और सत्ता के शीर्ष नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। रोहतास जिले में गुजरात की केमिकल फैक्ट्री हादसे में जान गंवाने वाले बिहारी मजदूरों के परिजनों से मुलाकात के दौरान किशोर ने भावुक और कड़े शब्दों में सरकारों को कटघरे में खड़ा किया।
चुनावी रैलियों और मौतों के बीच का अंतर
परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिहार की गलियों में वोट मांगने आते हैं, लेकिन जब बिहारी मजदूरों की लाशें दूसरे राज्यों से घर आती हैं, तो इन बड़े नेताओं के पास संवेदना का एक शब्द भी नहीं होता।
90 दिनों का खौफनाक आंकड़ा
पीके ने एक गंभीर दावा करते हुए कहा, “पिछले विधानसभा चुनाव (नवंबर 2025) के बाद से अब तक महज तीन-चार महीनों के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई दुर्घटनाओं में बिहार के करीब 50 मजदूरों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा डराने वाला है, लेकिन उससे भी ज्यादा डरावनी बिहार के मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री की चुप्पी है।”
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी हादसे के बाद न तो कोई आधिकारिक शोक संदेश आता है और न ही इन गरीब परिवारों के लिए किसी ठोस मुआवजे या भविष्य की सुरक्षा की घोषणा की जाती है।
पलायन: बिहार का स्थायी अभिशाप
प्रशांत किशोर ने इस त्रासदी को सीधे तौर पर बिहार के पिछड़ेपन और पलायन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में रोजगार होता, तो हमारे भाइयों को गुजरात या अन्य राज्यों की असुरक्षित फैक्ट्रियों में जान जोखिम में डालकर काम नहीं करना पड़ता।
“बिहार के लोग सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं। जब तक यहां व्यवस्था नहीं बदलेगी, तब तक हमारे मजदूर तिरंगे में लिपटे ताबूतों में घर लौटते रहेंगे।” — प्रशांत किशोर
