पटना: राजधानी पटना के इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित न्यू गार्डनियर रोड अस्पताल इन दिनों भारी अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। अस्पताल में साफ-सफाई की कमी, मरीजों की भारी भीड़ और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का अभाव साफ तौर पर दिखाई देता है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन व्यवस्थाएं उसी अनुपात में मजबूत नहीं की गई हैं। परिणामस्वरूप अस्पताल में आने वाले मरीजों को लंबी कतारों और अव्यवस्था के बीच इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
सबसे अधिक शिकायतें पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) काउंटर को लेकर सामने आ रही हैं। अस्पताल में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग काउंटर तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां अक्सर सिर्फ एक ही कर्मचारी काम करता हुआ दिखाई देता है। इसके कारण मरीजों की लंबी लाइन लग जाती है और कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है।
मरीजों का आरोप है कि रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मनमानी भी की जाती है। काउंटर पर बैठे कर्मचारी मरीज से केवल नाम, पता और उम्र पूछकर पर्ची बना देते हैं। मरीज की बीमारी क्या है या उसे किस डॉक्टर को दिखाना है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं ली जाती।
रसीद कटवाने के बाद जब मरीज अस्पताल के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि पर्ची में न तो बीमारी का उल्लेख है और न ही किसी डॉक्टर का नाम लिखा हुआ है। ऐसी स्थिति में मरीजों को दोबारा पैसे देकर फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
अस्पताल में रजिस्ट्रेशन काउंटर के अंदर भी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। बताया जाता है कि काउंटर के बगल वाले गेट से अस्पताल के कुछ कर्मचारी अपने परिचितों को अंदर ले जाकर उनका रजिस्ट्रेशन करवा देते हैं। वहीं काउंटर पर बैठे कर्मचारियों के परिचितों को भी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ती और वे सीधे केबिन में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं।
अस्पताल की सुरक्षा के लिए एक दर्जन से अधिक स्थानीय पुलिसकर्मी और निजी वर्दीधारी गार्ड तैनात किए गए हैं। लेकिन मरीजों का आरोप है कि ये सुरक्षाकर्मी अव्यवस्था को ठीक कराने के बजाय विरोध करने वाले मरीजों या उनके परिजनों को चुप कराने में अधिक सक्रिय नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अस्पताल प्रबंधन ने व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो राजधानी के इस महत्वपूर्ण अस्पताल की साख पर और भी गंभीर असर पड़ सकता है।
